सिंगूर पर टाटा को SC का झटका, ममता बनर्जी बोलीं- अब चैन से मर सकती हूं
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए टाटा मोटर्स को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिंगूर की जमीन को अपने कब्जे में ले और किसानों को 12 हफ्तों के भीतर वापस करे।
कोर्ट के फैसले के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अब चैन से मर सकती हूं। ममता ने बयान में कहा, 'मैं उन लोगों को याद कर रही हूं जिन्होंने इसके लिए बलिदान दिया। पश्चिम बंगाल राज्य का नाम बदलने के बाद हमें ये यादगार जीत मिली है। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं।'
2006 में पश्चिम बंगाल सरकार ने टाटा मोटर्स को नैनो प्लांट लगाने के लिए जमीन दी थी। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए थे। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस तब विपक्ष में थी और उसने किसानों के साथ मिलकर इस मुद्दे को लेकर आंदोलन छेड़ दिया था। इसी मुद्दे के बूते ममता बनर्जी पहली बार राज्य की सत्ता पर काबिज हुईं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन किसानों को मुआवजा मिल गया था, उन्हें लौटाना नहीं होगा, क्योंकि वे पिछले एक दशक से अपनी जीविका से दूर थे। कोर्ट ने उस डील को रद्द किया है, जिसके तहत लेफ्ट सरकार ने टाटा नैनो प्लांट के लिए पश्चिम बंगाल के सिंगूर में 1,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।
बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार ने अपनाई थी गलत प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण की जो प्रक्रिया अपनाई थी वो कई गलत थी।' सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से कहा कि वो 12 हफ्तों के अंदर जमीन के असली मालिकों को खोजकर उनकी जमीन वापस करे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसानों में खुशी का माहौल है। रंग-गुलाल लगाकर एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं। लोगों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी की जयकार के नारे भी लगाए। आपको बता दें कि ममता बेनर्जी ने सबसे पहले भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों के साथ धरना दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में टाटा और किसानों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्य सकार ने टाटा ग्रुप को हजार एकड़ जमीन टाटा नैनो प्लांट लगाने के लिए दी थी, लेकिन किसानों और तृणमूल कांग्रेस के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद यह प्रोजेक्ट अधर में रह गया था।