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Senthil Balaji HCP: 11 जुलाई को तीसरे न्यायाधीश के सामने शुरू होगी बहस, जस्टिस सीवी कार्तिकेयन ने दिया आदेश

Fri, 07 Jul 2023 06:01 PM IST
देव कश्यप पीटीआी, चेन्नई।
पीटीआी, चेन्नई। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 07 Jul 2023 06:01 PM IST
सार

न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (एचसीपी) की सुनवाई के लिए 11 जुलाई से बहस शुरू करने के लिए शुक्रवार को एक आदेश पारित किया।

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Senthil Balaji Habeas Corpus Petition: Arguments to commence before third judge on 11 July
गिरफ्तार किए गए मंत्री वी. सेंथिल बालाजी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के गिरफ्तार किए गए मंत्री वी. सेंथिल बालाजी की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर दलीलें शुरू करने के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की। उस दिन तीसरे न्यायाधीश इस मामले पर पहले एक पीठ द्वारा दिए गए खंडित फैसले के बाद सुनवाई करेंगे। बालाजी की पत्नी मेगला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर खंडित फैसले के बाद मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला ने न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन को मामले की सुनवाई के लिए तीसरा न्यायाधीश नियुक्त किया था।

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न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (एचसीपी) की सुनवाई के लिए 11 जुलाई से बहस शुरू करने के लिए शुक्रवार को एक आदेश पारित किया। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने खंडित फैसला देने वाले दो न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति जे निशा बानू और न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती के बीच मतभेदों को इंगित करते हुए सारणीबद्ध रूप में एक चार्ट तैयार किया था और उसे बालाजी के वकील और अदालत में वितरित किया था।

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न्यायमूर्ति जे निशा बानू और न्यायमूर्ति डी भारत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने चार जुलाई को इस संबंध में खंडित फैसला दिया था। न्यायमूर्ति बानू ने कहा था कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करने योग्य है, लेकिन न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने इससे इनकार किया था।

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अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को दो न्यायाधीशों द्वारा व्यक्त की गई राय के अंतर का परीक्षण करना होगा, यानी कि क्या प्रवर्तन निदेशालय के पास पुलिस हिरासत मांगने की शक्तियां हैं और क्या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद एचसीपी बरकरार रखने योग्य थी। न्यायाधीश ने कहा, इस अदालत को यह भी परीक्षण करना होगा कि क्या पुलिस हिरासत की अवधि को प्रारंभिक रिमांड की तारीख से 15 दिनों की अवधि से आगे बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि सत्र न्यायाधीश इसकी वर्तमान अवधि समाप्त होने के बाद रिमांड पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

शुक्रवार को जब मामले की सुनवाई हुई तो ईडी ने दोनों जजों के बीच तीन मतभेद पेश किए। बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन आर एलांगो ने दो और मतभेदों को जोड़ते हुए एक और चार्ट भी पेश किया। हालांकि, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई। जब न्यायाधीश ने कहा कि वह शनिवार को एचसीपी पर सुनवाई शुरू करेंगे, तो एलांगो ने कहा कि वरिष्ठ वकील काबिल सिब्बल याचिकाकर्ता की ओर से पेश होंगे। व्यक्तिगत असुविधा के कारण वह शनिवार को इस मामले पर बहस करने के लिए चेन्नई नहीं आ पाएंगे लेकिन 11 जुलाई को इस मामले पर बहस करने के लिए यहां आएंगे।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 11 जुलाई को एक संवैधानिक पीठ एक मामले की सुनवाई कर रही है और सुप्रीम कोर्ट में उनकी उपस्थिति आवश्यक है और अगर अदालत अनुमति देती है तो वह अगले दिन इस मामले पर बहस करेंगे। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील को 11 जुलाई को अपनी दलीलें शुरू करने दें।

इस बीच, मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति पीडी औडिकेसवालु की पहली पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी, जिसमें तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि द्वारा बालाजी को राज्य मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और बाद में उसे स्थगित रखने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी की। पीठ ने एक अन्य याचिका को भी एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया, जिसमें सवाल उठाया गया था कि सेंथिल बालाजी किस अधिकार के तहत मंत्री का पद संभाल रहे हैं।


बता दें कि बालाजी को 14 जून को ईडी ने ‘रुपये के बदले नौकरी देने’ के मामले में गिरफ्तार किया था, जब वह पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक शासन में परिवहन मंत्री थे। वह तब से अस्पताल में हैं और उनकी कोरोनरी बाईपास सर्जरी हुई है और वह बिना विभाग के मंत्री हैं।

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