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Railway: रेलवे के खिलाफ वीआरएस केस जीतने वाले अधिकारी पर की गई बदले की कार्रवाई, कर्मचारी संगठनों का आरोप

Sun, 08 Oct 2023 10:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 08 Oct 2023 10:31 PM IST
सार

Railways: कर्मचारी संगठनों के विरोध के बीच आगरा मंडल के एक मुख्य मंडल रेल नियंत्रक का मथुरा तबादला कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी ने इस साल जुलाई में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में रेलवे के खिलाफ वीआरएस का मामला जीत लिया था।

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Senior official who won VRS case against Railways given 'punishment posting', alleges employees' unions
रेलवे (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कर्मचारी संगठनों के विरोध के बीच आगरा मंडल के एक मुख्य मंडल रेल नियंत्रक का मथुरा तबादला कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी ने इस साल जुलाई में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में रेलवे के खिलाफ वीआरएस का मामला जीत लिया था। संगठनों ने रविवार को इस कदम को 'बदले की कार्रवाई' करार दिया है।

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संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्य संभागीय नियंत्रक दिनेश कपिल को सजा के रूप यह पोस्टिंग की गई है, क्योंकि उन्होंने रेलवे के खिलाफ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) का मामला जीता है। हालांकि, उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) जोन, जिसके तहत आगरा मंडल आता है, ने स्थानांतरण को सही ठहराया है।

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एनसीआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु उपाध्याय ने कहा, रेलवे में विभिन्न विभागों में पोस्टिंग आवश्यकताओं के अधीन है। हमने न्यायाधिकरण के फैसले का सम्मान किया है और निर्धारित समय सीमा के भीतर पोस्टिंग प्रदान की है।

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उपाध्याय ने माना कि कपिल एक बहुत अच्छे नियंत्रक हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि मथुरा स्टेशन को रेल नियंत्रक की आवश्यकता क्यों है। कपिल की नई जॉब प्रोफाइल मुख्य नियंत्रक (10 घंटे) है और उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि लोको पायलटों के काम के घंटे 10 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए।

रेल नियंत्रक विभाग में तैनात अधिकारियों ने बताया कि लोको पायलटों के काम के घंटों की निगरानी हमेशा रेलवे जोन के मंडल नियंत्रक कार्यालय द्वारा की जाती है। ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कहा, 'मथुरा में कोई नियंत्रक कार्यालय नहीं है। यह दंडात्मक तैनाती है और रेलवे में उच्च कुशल मानव शक्ति की बर्बादी है। मैंने मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की है और रेलवे बोर्ड को भी पत्र लिखूंगा।'

कैट के 19 जुलाई के आदेश के बाद कपिल को 11 सितंबर को आगरा मंडल में शामिल होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्हें मथुरा रेलवे स्टेशन पर स्थानांतरित कर दिया गया था। कपिल ने अपने सीनियर के साथ विवाद के बाद समय से पहले वीआरएस लेने का विकल्प चुना था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना आवेदन वापस लेने का फैसला किया। लेकिन रेलवे ने नाम वापस लेने के उनके अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद बहाली के लिए उन्होंने कैट का रुख किया था।

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