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मणिपुर में दूसरे चरण का मतदान आज, 22 सीटों पर डाले जा रहे वोट

Wed, 08 Mar 2017 09:41 AM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, इंफाल
रीता तिवारी/ अमर उजाला, इंफाल Updated Wed, 08 Mar 2017 09:41 AM IST
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second phase polls in Manipur today
सांकेतिक चित्र

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में दूसरे और आखिरी चरण में छह जिलों की 22 सीटों पर बुधवार को वोट डाले जाएंगे। इनमें लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे इबोबी सिंह की पारंपरिक थाउबल सीट भी शामिल है। इस मौके पर सब यही सवाल पूछ रहे हैं कि राज्य की मौजूदा परिस्थितियों में इबोबी कांग्रेस को लगातार चौथी बार सत्ता दिला सकेंगे या नहीं। उनको भाजपा की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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वर्ष 2002 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के दो साल बाद ही इबोबी को अपने करियर की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। वह था सुरक्षा बल के जवानों की ओर से मनोरमा देवी नामक एक युवती का सामूहिक बलात्कार और हत्या। उस घटना में भारत ही नहीं पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं। इसके खिलाफ मणिपुरी महिलाओं ने बिना कपड़ों के असम राइफल्स के मुख्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया था। उस तस्वीर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। इस घटना के बाद इंफाल नगर पालिका इलाके से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को हटाना पड़ा था। बावजूद इसके राज्य के लोगों ने तीन साल बाद होने वाले चुनावों में एक बार फिर इबोबी और कांग्रेस पर ही भरोसा जताया था।
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अपने कार्यकाल के दौरान इबोबी को राज्य में लगातार बढ़ते उग्रवाद, सुरक्षा बलों की ज्यादातियों, घाटी और पर्वतीय इलाकों में रहने वाली मैतेयी और नगा जनजातियों के बीच लगातार बढ़ती खाई जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ा है। राज्य में इस दौरान विकास ठप होने के भी आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा मणिपुर को समय-समय पर आर्थिक नाकेबंदी से जूझना पड़ा है। इस समय भी कोई चार महीने से लंबे अरसे से आर्थिक नाकेबंदी लागू है। राज्य में सात नए जिलों के गठन के विरोध में नगा संगठनों ने इस नाकेबंदी की अपील की है।
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उग्रवादी संगठनों की धमकियों की वजह से बीते कुछ महीनों के दौरान कांग्रेस के कम से कम छह वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ कर विरोधी दलों का हाथ थाम लिया है। इसके साथ ही बीते साल असम की सत्ता पर कब्जे के बाद भारतीय जनता पार्टी राज्य में सत्ता की प्रबल दावेदार के तौर पर सामने आई है। राज्य की इस मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में इबोबी एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। उनकी पारंपरिक थाउबल सीट पर मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला उनके खिलाफ मैदान में हैं।

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