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दूसरी स्वदेशी वैक्सीन : जायडस कैडिला की वैक्सीन 66 प्रतिशत होगी कोरोना पर असरदार, सितंबर से शुरू होगी सप्लाई
Sat, 21 Aug 2021 02:21 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 21 Aug 2021 02:21 PM IST
सार
दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला yCoV-D, कोरोना व इसके डेल्टा प्लस वैरिएंट पर 66 प्रतिशत तक असरदार होगी। सितंबर माह से इसकी सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। कंपनी ने कहा है कि अगले सप्ताह तक वैक्सीन की कीमत का निर्धारण कर लिया जाएगा।
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जायडस कैडिला
- फोटो : self
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विस्तार
कोवैक्सीन के बाद दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जायडस कैडिला yCoV-D कोरोना पर 66 प्रतिशत तक असरदार होगी। वहीं डेल्टा प्लस वैरिएंट पर भी यह वैक्सीन 66 प्रतिशत असर करेगी। यह जानकारी जायडस ग्रुप के एमडी डॉ. शार्विल पटेल ने दी।
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उन्होंने बताया कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद अब अगले सप्ताह तक इसकी कीमत का भी निर्धारण कर लिया जाएगा। सितंबर महीने में इसकी सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। डॉ. शार्विल ने बताया कि अक्टूबर से वैक्सीन का उत्पादन एक करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
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28 वें व 56वें दिन लगेगी दूसरी व तीसरी डोज
जायडस कैडिला की yCoV-D वैक्सीन तीन डोज में दी जाएगी। वैक्सीन की एक डोज लगने के बाद दूसरी डोज 28वें दिन व तीसरी डोज 56वें दिन लगाई जाएगी। यह वैक्सीन को 12 वर्ष से ज्यादा की उम्र के बच्चों को लगाई जाएगी।
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डीएनए आधारित है वैक्सीन
खास बात यह है कि इस वक्त जहां दुनियाभर में आरएनए वैक्सीन की मौजूदगी सबसे ज्यादा है, वहीं जायडस कैडिला की ये वैक्सीन विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। कोविड-19 संबंधी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (CDSCO) की एक विशेषज्ञ समिति ने जायकोव-डी को मंजूरी देने के जॉयडस कैडिला के आवेदन पर गुरुवार को विचार किया था। इसके बाद इसने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को इसे आपात इस्तेमाल की इजाजत देने की सिफारिश की। डीसीजीआई ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी थी।
50 केंद्रों पर ट्रायल का दावा
जायडस कैडिला ने दावा किया है कि उसने भारत में वैक्सीन का सबसे बड़ा ट्रायल किया है। 50 से ज्यादा केंद्रों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया। अब तक सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बॉयोटेक की कोवाक्सिन, रूस की स्पूतनिक-वी, अमेरिका की मॉडर्ना व जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवाक्सिन देश की पहली स्वदेशी वैक्सीन है।
कई खासियत है इस वैक्सीन की
कई मामलों में इसे सबसे खास माना जा रहा है। जायकोव-डी वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। देश में लग रही कोरोना की बाकी वैक्सीनों से अलग जायकोव-डी के तीन डोज देने की जरूरत होगी।
बगैर सुई के लगने से बच्चों को राहत मिलेगी
जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। इससे 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को यह आसानी से लगाई जा सकेगी। यह इंजेक्टर के जरिये दी जाएगी। दर्द न के बराबर होगा। यह 12-18 साल के वायु वर्ग वालों के साथ बड़ों को भी लग सकेगी। देश में अभी सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का ही टीकाकरण हो रहा था। जायकोव-डी से अब 12 से 18 साल तक के किशोरों को भी टीके लग सकेंगे। जायडस कैडिला की एक साल में 10 करोड़ से 12 करोड़ खुराक बनाने की तैयारी है।