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SEBI: सेबी अध्यक्ष बोलीं- शेयर बाजार लेनदेन में तुरंत निपटान पर हो रहा काम; जानें निवेशकों को क्या होगा फायदा

Mon, 24 Jul 2023 08:39 PM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 24 Jul 2023 08:39 PM IST
सार

इस साल जनवरी के अंत में भारत ने इक्विटी के लिए बाजार-व्यापी लेनदेन+1 (टी+1) निपटान प्रणाली का पालन करना शुरू कर दिया था। पहले, यह टी+2 चक्र में था। 

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SEBI working on instant settlement of stock market transactions
सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच। - फोटो : ANI

विस्तार

सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने सोमवार को कहा कि वित्तीय बाजार नियामक स्टॉक एक्सचेंजों में लेनदेन के तत्काल निपटान के लिए एक तंत्र पर काम कर रहा है। बुच ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निश्चित रूप से जिन चीजों के बारे में हम सोचते हैं कि वे बहुत दूर नहीं हैं, उनमें से एक स्टॉक एक्सचेंज के लिए तत्काल निपटान भी है।

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उन्होंने आगे कहा, हम इस पर काम कर रहे हैं, हम इस परिवेश के साथ जुड़े हुए हैं और हमारा मानना है कि निकट भविष्य में हमारे पास एक तंत्र होगा जो स्टॉक एक्सचेंजों पर लेनदेन के तत्काल निपटान की सुविधा प्रदान करेगा। हम इसी ओर जा रहे हैं।
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इस साल जनवरी के अंत में भारत ने इक्विटी के लिए बाजार-व्यापी लेनदेन+1 (टी+1) निपटान प्रणाली का पालन करना शुरू कर दिया था। पहले, यह टी+2 चक्र में था। नई टी+1 प्रणाली पहली बार बाजार नियामक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा 2021 में पेश की गई थी और इसे बाजार पूंजीकरण के आधार पर सबसे छोटी कंपनियों से लेकर बड़ी कंपनियों तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
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टी+1 प्रणाली का मतलब है कि लेनदेन एक दिन या 24 घंटे के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, टी+1 के तहत यदि किसी निवेशक ने सोमवार को शेयर खरीदा है, तो पैसा मंगलवार को ग्राहक के डीमैट खाते में जमा किया जाएगा। एक बार तात्कालिक निपटान लागू हो जाने पर वास्तविक समय के आधार पर निवेशकों के हाथों में पैसा आ जाएगा।

वित्तीय बाजार नियामक सेबी के बोर्ड ने पिछले महीने प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के माध्यम से किसी कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग की समय अवधि को मौजूदा छह दिनों से घटाकर तीन दिन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। सेबी ने कहा था कि संशोधित समयसीमा दो चरणों में लागू की जाएगी- एक सितंबर, 2023 को या उसके बाद खुलने वाले सभी आईपीओ के लिए यह स्वैच्छिक और एक दिसंबर, 2023 को या उसके बाद के लिए यह अनिवार्य होगा। सेबी ने कहा कि दिनों को आधा करने का निर्णय सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लिया गया है।है


यह पुष्टि करने के लिए व्यापक तौर पर परीक्षण किया गया है कि टी+3 में परिवर्तनकाल सुचारू होगा। आईपीओ लिस्टिंग समयसीमा में कमी से लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि जारीकर्ताओं को ज्यादा फंड प्राप्त होंगे और आवंटियों को कम समय अवधि में उनकी प्रतिभूतियां प्राप्त होंगी। इसके अलावा, जिन ग्राहकों को शेयर आवंटित नहीं किए गए थे, उन्हें उनका पैसा तुरंत वापस मिल जाएगा और सभी हितधारकों के संसाधन - जैसे स्टॉक एक्सचेंज, बैंक, डिपॉजिटरी, सार्वजनिक निर्गम प्रक्रिया में ब्रोकर्स छोटी अवधि के लिए बाजार में तैनात रहेंगे।

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