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SC: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सीजेआई चंद्रचूड़ को लिखा पत्र, दो मामलों की सुनवाई न होने का मुद्दा उठाया
Wed, 18 Jan 2023 09:21 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 18 Jan 2023 09:21 PM IST
सार
पत्र में कहा गया है, 'एससीबीए को न्याय व्यवस्था की संस्था में समान हितधारक होने के नाते अपने सदस्यों के कल्याण से संबंधित मामले को सामान्य रूप से सूचीबद्ध करने और सुनवाई पर जोर देने में अजनबी नहीं माना जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सु्प्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूढ़ को पत्र लिखा और अपने सदस्यों के जीवन और आजीविका से जुड़े दो मामलों की सुनवाई न होने का मुद्दा उठाया।
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पत्र में एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि आईटीओ के पास शीर्ष कोर्ट को 1.33 एकड़ जमीन आवंटित है। इसे वकीलों के लिए चैंबर ब्लॉक के रूप में बदलने की अनुमति देने के लिए शहरी विकास मंत्रालय को निर्देश देने की मांग वाली याचिका सहित दो मामलों की सुनवाई न होना एक गंभीर चिंता का विषय है।
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इसमें कहा गया है कि एक अन्य मामला नोएडा में एससीबीए मल्टी स्टेट ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के लिए बनाए गए सुप्रीम टावरों की तत्काल मरम्मत से संबंधित है, जहां 700 से अधिक वकील अपने परिवारों के साथ रहते हैं। सिंह ने पत्र में कहा, उपरोक्त दो मामले एससीबीए के सदस्यों के 'जीवन और आजीविका' से जुड़े हैं और इन मामलों की सुनवाई न होना एक गंभीर चिंता का विषय है।
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पत्र में कहा गया है, 'एससीबीए को न्याय व्यवस्था की संस्था में समान हितधारक होने के नाते अपने सदस्यों के कल्याण से संबंधित मामले को सामान्य रूप से सूचीबद्ध करने और सुनवाई पर जोर देने में अजनबी नहीं माना जा सकता है।
इसमें आगे कहा गया है कि सुनवाई के लिए एससीबीए के अनुरोध को ठुकराकर बार एसोसिएशन के साथ एक साधारण वादी से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है। हमें अब लग रहा है कि एससीबीए ने अपने इतिहास में कभी हड़ताल का सहारा नहीं लिया है, इसलिए उसे उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है। इस अनुचित व्यवहार को देखते हुए हम आशा और विश्वास करते हैं कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं की जाएगी कि हमें विरोध के किसी गरिमापूर्ण तरीके का सहारा लेने के लिए मजबूर किया जाए।
सिंह ने पत्र में कहा कि वह बार की आकांक्षाओं को व्यक्त कर रहे हैं जो बिना किसी प्राथमिकता के केवल किसी अन्य वादी की तरह व्यवहार किया जाना चाहता है।