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Supreme Court: ईडी की शक्तियों पर फिर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट, 2022 के फैसले पर क्यों उठे सवाल?

Thu, 20 Aug 2026 03:14 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 20 Aug 2026 03:14 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट अब 2022 के उस फैसले की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने का अधिकार दिया गया था। क्या इस सुनवाई के बाद ईडी की इन शक्तियों पर कोई बदलाव होगा? पूरा मामला क्या है, रिपोर्ट में जानिए। 

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SC to hear review pleas against 2022 verdict upholding ED’s powers in money laundering cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाओं को सुनवाई के लिए लगाने पर सहमति जताई, जिनमें 2022 के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है। उस फैसले में कोर्ट ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी करने, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्तियां जब्त करने और तलाशी व जब्ती की कार्रवाई करने की शक्ति को बरकरार रखा था।
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चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस वी मोहन की पीठ ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलील पर ध्यान दिया। सिब्बल कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि इन याचिकाओं पर नोटिस अगस्त 2022 में ही जारी हो चुके थे और अब इन पर सुनवाई होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि अगर इन मामलों को उसी पीठ के सामने लगाया जाता है, जिसने पहले इनकी सुनवाई की थी, तो तीन मौजूदा पीठों को 'तोड़ना' पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि उन पीठों के बाकी दो जज अब अलग-अलग पीठों में बैठ रहे हैं।
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मामले की जल्द सुनवाई की जरूरत को देखते हुए सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस बागची व जस्टिस मोहन की पीठ ही इसकी सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख बाद में बताई जाएगी।

पहले किस मुद्दे पर होगी सुनवाई?
पिछले साल 31 जुलाई को पीठ ने कहा था कि वह सबसे पहले 2022 के फैसले पर दोबारा विचार की मांग वाली याचिकाओं की सुनवाई हो सकती है या नहीं, इस मुद्दे पर दलीलें सुनेगी। 

2022 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में गिरफ्तारी करने, संपत्ति जब्त करने और तलाशी व जब्ती करने की शक्ति को बरकरार रखा था। पीठ ने कहा था कि ईडी ने तीन शुरुआती सवाल उठाए हैं। ये सवाल मुख्य रूप से इस बात से जुड़े हैं कि पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है या नहीं।

पीठ ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों ने कोर्ट के सामने विचार के लिए 13 सवाल रखे हैं। पीठ ने कहा था कि चूंकि ये मुद्दे पुनर्विचार की कार्यवाही से जुड़े हैं, इसलिए पहले यह सुना जाएगा कि पुनर्विचार याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों की ओर से उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी।

कोर्ट ने कहा था कि अगर वह यह मानता है कि पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है, तो आखिर में उन सवालों को भी तय किया जाएगा, जिन पर वास्तव में विचार करना जरूरी होगा।जस्टिस सूर्य कांत ने कहा था, वे सबसे पहले शुरुआती मुद्दे उठाने के लिए सही हैं- क्या पुनर्विचार याचिका सुनवाई योग्य है। हम सभी जानते हैं कि पुनर्विचार की अपनी सीमाएं होती हैं। कभी-कभी हमारा नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन फिर भी हम उसे बदल नहीं सकते। 

केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई उन दो खास मुद्दों से आगे नहीं बढ़ सकती, जिन पर अगस्त 2022 में याचिकाओं पर नोटिस जारी करने वाले सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने ध्यान दिया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगस्त 2022 में पुनर्विचार याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार करने पर विचार करने वाली पीठ ने केवल दो मुद्दों पर नोटिस जारी किया था।

इनमें आरोपी को ईसीआईआर की कॉपी देना और धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की धारा 24 के तहत सबूत देने की जिम्मेदारी का उलट जाना शामिल था।

2022 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में पीएमएलए के तहत ईडी की गिरफ्तारी करने, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्ति जब्त करने और तलाशी व जब्ती की कार्रवाई करने की शक्तियों को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग दुनियाभर में वित्तीय व्यवस्था के सही तरीके से काम करने के लिए 'खतरा' है। इसलिए पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग कोई 'सामान्य अपराध' नहीं है।  

शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि 2002 के इस कानून के तहत काम करने वाले अधिकारी 'पुलिस अधिकारी नहीं हैं।' कोर्ट ने यह भी कहा था कि ईसीआईआर को सीआरपीसी की एफआईआर के बराबर नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा था कि हर मामले में संबंधित व्यक्ति को ईसीआईआर की कॉपी देना जरूरी नहीं है। गिरफ्तारी के समय ईडी अगर गिरफ्तारी का कारण बता देती है, तो यह पर्याप्त है।


फैसले को क्यों चुनौती दी गई?
2022 का फैसला 200 से ज्यादा याचिकाओं पर आया था। इन याचिकाओं में पीएमएलए के कई प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। विपक्ष अक्सर आरोप लगाता रहा है कि सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए इस कानून का इस्तेमाल करती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि पीएमएलए की धारा 45 उचित है। यह धारा अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती मानती है और जमानत के लिए दो शर्तें रखती है। कोर्ट ने कहा था कि ये प्रावधान मनमाने या अनुचित नहीं हैं।
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