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राइट टू प्राइवेसी: मौलिक अधिकार है या नहीं, 27 अगस्त को SC सुनाएगा फैसला

Thu, 03 Aug 2017 02:26 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो /अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 03 Aug 2017 02:26 AM IST
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SC's Constitution bench reserved its judgement over issue of Privacy matter

निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ 27 अगस्त तक इस पर अपना फैसला सुनाएगी। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश खेहर 27 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
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करीब एक पखवाड़े तक चली मैराथन सुनवाई में केंद्र सरकार व गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र केरल आदि राज्यों के अलावा याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान, गोपाल सुब्रह्मण्यम आदि ने अपने पक्ष रखे। केंद्र सरकार का कहना था कि निजता का अधिकार तो है लेकिन यह मौलिक अधिकार नहीं है। 
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मालूम हो कि आधार मामले पर सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा किया जा रहा था कि आधार, निजता के अधिकार का उल्लंघन है। पांच सदस्यीय पीठ ने निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है या नहीं, इस मसले पर अंतिम व्यवस्था के लिए इस मसले को नौ सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया था।

वर्ष 1950 में आठ सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार नहीं है, ऐसे में बड़ी पीठ द्वारा इसका परीक्षण आवश्यक है। पीठ ने कहा कि वर्ष 1950 में एमपी शर्मा और 1960 में खड़क सिंह मामले में दिए फैसलों का परीक्षण जरूरी है। 

बुनियादी निजी सूचना निजता के अधिकार के दायरे में नहीं

SC's Constitution bench reserved its judgement over issue of Privacy matter
वहीं उच्चतम न्यायलय से गुजरात सरकार ने कहा कि पारदर्शिता आज के तकनीकी युग का एक प्रमुख अंग है और बुनियादी सूचना प्रदान करने को निजता के अधिकार के दायरे में नहीं लाया जा सकता है।
 
सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि निजता के कुछ पहलुओं को विभिन्न मौलिक अधिकारों में रखा जा सकता है, लेकिन प्राधिकारियों को बुनियादी निजी सूचना प्रदान करना मौजूदा तकनीकी युग में ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है। 

उन्होंने कहा आप नियमावली के तहत विभिन्न निजी सूचनाएं मांग कर तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस तथ्य का जिक्र किया कि उच्चतम न्यायालय पीआईएल दायर करने की इजाजत देने के लिए नाम, पता, टेलीफोन नंबर, पेशा और आधार जैसी निजी सूचना मांग रहा। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि निजी सूचना का उपयोग सिर्फ अभिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। 
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