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SC: सुप्रीम कोर्ट से तेलंगाना CM को राहत, 2015 के कैश फॉर वोट घोटाले मामले को स्थानांतरित करने से किया इनकार
Fri, 20 Sep 2024 12:41 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 20 Sep 2024 12:41 PM IST
सार
विधान परिषद चुनाव के दौरान टीडीपी उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी का समर्थन करने के लिए रेवंत रेड्डी ने मनोनीत विधायक एल्विस स्टीफेंसन को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट से भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने 2015 के कैश-फॉर-वोट घोटाला मामले को भोपाल स्थानांतरित किए जाने से इनकार कर दिया है। दरअसल, इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी आरोपी हैं।
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अदालत ने रेड्डी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अभियोजन के कामकाज में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करें। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने निर्देश दिया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक मामले के अभियोजन के संबंध में तेलंगाना के मुख्यमंत्री को रिपोर्ट नहीं करेंगे।
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राजनीतिक मकसद से दायर की गई याचिका
रेड्डी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मामले में मुकदमा स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका राजनीतिक मकसद से दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
शीर्ष अदालत ने इससे पहले रेड्डी की उस टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसमें उन्होंने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामलों में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के कविता को शीर्ष अदालत द्वारा जमानत दिए जाने पर टिप्पणी की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह उम्मीद की जाती है कि संविधान के सभी तीनों अंग एक-दूसरे के कामकाज के प्रति परस्पर सम्मान दिखाएंगे।
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मुद्दे को नहीं बढ़ाना चाहते आगे: सीएम रेड्डी
पीठ ने रेड्डी द्वारा दायर हलफनामे पर गौर किया, जिसमें उन्होंने अदालत से माफी मांगी और कहा कि वह इस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ना चाहती। उन्होंने कहा कि हालांकि हम इस मामले में आगे नहीं बढ़ना चाहते हैं, लेकिन हम सभी संवैधानिक पदाधिकारियों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को केवल यह कह सकते हैं कि वे संविधान द्वारा उनके लिए निर्धारित क्षेत्रों में अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करें।
क्या है 2015 का कैश फॉर वोट मामला?
उल्लेखनीय है कि 31 मई, 2015 को रेवंत रेड्डी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार किया था। उस वक्त रेवंत रेड्डी तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) से जुड़े हुए थे। आरोप है कि विधान परिषद चुनाव के दौरान टीडीपी उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी का समर्थन करने के लिए रेवंत रेड्डी ने मनोनीत विधायक एल्विस स्टीफेंसन को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। रेवंत रेड्डी के अलावा, एसीबी ने कुछ अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। बाद में उन सभी को जमानत दे दी गई।
सुनवाई भोपाल स्थानांतरित करने की मांग
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायक गुंटाकंडला जगदीश रेड्डी और तीन अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं वरिष्ठ वकील सी आर्यमा सुंदरम ने याचिका दायर कर कैश फॉर वोट मामले की सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि रेवंत रेड्डी अब तेलंगाना के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हैं। याचिका में दलील दी गई थी कि प्राकृतिक न्याय का नियम है कि 'कोई भी व्यक्ति अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता।'
कोर्ट ने कहा था- विशेष सरकारी वकील नियुक्त करेंगे
याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा था, 'केवल आशंका के आधार पर हम कैसे सुनवाई कर सकते हैं। अगर हम ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे, तो इसका मतलब है कि हम अपने न्यायिक अधिकारियों पर विश्वास नहीं करेंगे।' इसके बाद पीठ ने कहा था कि वह विश्वास जगाने के लिए एक स्वतंत्र सरकारी वकील नियुक्त करने का आदेश पारित करेगी।