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इशरत जहां केस: बर्खास्त आईपीएस अधिकारी को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र के आदेश पर रोक लगाने से इनकार

Wed, 28 Sep 2022 10:16 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 28 Sep 2022 10:16 PM IST
सार

आईपीएस अधिकारी वर्मा को 30 सितंबर को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले 30 अगस्त को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। 

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SC refuses to stay Centre's order dismissing Guj cadre IPS officer who probed Ishrat Jahan encounter
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई की जांच में मदद करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश चंद्र वर्मा को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले बर्खास्त करने के केंद्र के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वर्मा को 30 सितंबर को उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले 30 अगस्त को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। विभागीय जांच में उन्हें मीडिया के साथ बातचीत सहित विभिन्न आरोपों का दोषी पाया गया था। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती जिसने इस मुद्दे पर केंद्र के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार 
अदालत ने कहा, हमने पक्षकारों के वकील को सुना। हम याचिकाकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। ध्यान दें कि यह एक अंतरिम आदेश है। हम निर्देश देते हैं कि याचिका 22 नवंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में सूचीबद्ध हो जाए। तब तक दलीलें पूरी कर ली जाएंगी। हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि मामले का शीघ्र निपटारा किया जाए। वर्मा के वकील ने दलील दी कि 36 साल की सेवा के बाद वह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। कम से कम उन्हें सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने और बाहर निकलने दें। 
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पीठ ने तब कहा, यदि आप सफल होने के हकदार हैं तो अदालत में फैसला होगा। यदि आप न्याय के हकदार हैं, तो आप इसे प्राप्त करेंगे। आपको कई कष्टों, समस्याओं से गुजरना पड़ता है लेकिन अगर सच्चाई आपके पक्ष में है यह आपके पास आएगा। चिंता न करें। लेकिन हम इसे अभी नहीं कर सकते। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दो महीने में मामले का फैसला करने के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश पर आपत्ति जताई और कहा कि कहानी का एक गहरा पक्ष है। 
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सॉलिसिटर जनरल ने मंगलवार को शीर्ष अदालत को बताया था कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देने से इनकार करने के बाद वर्मा की बर्खास्तगी से खाली हुए पद पर डॉ. महेश्वर दयाल (आईपीएस, आईजी, कोबरा सेक्टर) को नियुक्त किया गया है। और उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है।

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