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करूर भगदड़: पीड़ितों को मिलेगी सरकारी नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने HC के फैसले को पलटा, टीवीके ने क्या कहा?

Fri, 14 Aug 2026 12:25 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 14 Aug 2026 12:25 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि अगर हादसे में परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य मारा गया है, तो उसके बेटे-बेटी को नौकरी देने की नीति पर सवाल क्यों उठाया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके तहत पिछले साल करूर में भगदड़ में मारे गए लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी दी जानी थी। टीवीके ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। 

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बेंच ने क्या कहा? 
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया। बेंच ने उस पीआईएल याचिकाकर्ता से कहा,'सरकार की पॉलिसी पर सवाल उठाने वाले आप कौन होते हैं? मान लीजिए कि हादसे में परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य मारा गया, तो क्या सरकार को उसके बेटे या बेटी को नौकरी नहीं देनी चाहिए?'

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टीवीके ने कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
टीवीके के प्रवक्ता अमेरिकई वी नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की है। उन्होंने पिछली डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नारायणन ने कहा कि जब टीवीके के संस्थापक प्रमुख विजय पिछले साल करूर में एक रैली को संबोधित करने गए थे तब तत्कालीन सरकार ने स्थिति संभालने में भारी लापरवाही बरती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह समझना चाहिए कि सरकार की ओर से गरीब और आम लोगों को दी जाने वाली मदद में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
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टीवीके पदाधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार अच्छी तरह जानती थी कि विजय को देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है। इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। उन्होंने कहा कि जब प्रभावित परिवारों को नौकरी के जरिए मदद देने का लक्ष्य हो तो ऐसे मामलों में कानूनी अड़चनें पैदा नहीं की जानी चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट ने क्या फैसला लिया था? 
टीवीके सरकार को एक झटका देते हुए, मद्रास हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को विजय के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें पिछले साल करूर में भगदड़ में मारे गए लोगों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि इससे ऐसी ही और भी कई मांगें उठने लगेंगी।

हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और आर शक्तिवेल शामिल थे।  उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में 'कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट' (दया के आधार पर नियुक्ति) का इंतजार कर रहे बहुत से लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।


क्या था पूरा मामला? 
बता दें कि  पिछले वर्ष 27 सितंबर को करूर में टीवीके की  एक सार्वजनिक सभा के दौरान  भगदड़ मची। जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी।  इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था और राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। भगदड़ में मारे गए सभी लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री विजय ने 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसके अलावा उन्होंने दीर्घकालिक सहायता देने का भी आश्वासन दिया था। 

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