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आजम खान के बेटे को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार

Fri, 17 Jan 2020 12:45 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 17 Jan 2020 12:45 PM IST
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SC issues notice to Nawab Kazim on plea filed by Abdullah Azam Khan against Allahabad HC order
अबदुल्लाह आजम खान (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

उच्चतम न्यायालय ने सपा सांसद मोहम्मद आजम खां के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां का उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचन रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।

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उच्च न्यायालय ने बसपा प्रत्याशी नवाज काजिम अली खां को हराने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां का निर्वाचन इस आधार पर रद्द कर दिया था कि उनकी आयु कम थी और वह 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।
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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां की याचिका पर निर्वाचन आयोग और रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर पराजित हुए बसपा के नवाज काजिम अली खां नोटिस जारी किए। दोनों को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है।
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पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई की जाएगी क्योंकि स्कूल रिकॉर्ड के अलावा कुछ अन्य दस्तावेज पेश करके यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि अब्दुल्ला आजम खां चुनाव लड़ने के योग्य थे। ये दस्तावेज पेश करके उनके चुनाव लड़ने की पात्रता के बारे में कुछ संशय पैदा किया गया है। पीठ ने कहा, ‘हमने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला पढ़ा है, यह साक्ष्य पर आधारित है।’

अब्दुल्ला खां ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए 17 दिसंबर को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि 2017 के चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल करते समय वह 25 साल के नहीं हुए थे और इसलिए वह विधानसभा का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।

बसपा के पराजित उम्मीदवार नवाज काजिम अली खां ने अब्दुल्ला खां के निर्वाचन के खिलाफ उच्च न्यायालय में दायर याचिका में दावा किया था कि निर्वाचित विधायक की वास्तविक जन्म तिथि 30 सितंबर, 1990 नहीं बल्कि एक जनवरी, 1993 है। अब्दुल्ला खां ने नामांकन पत्र में अपनी जन्म तिथि 30 सितंबर, 1990 लिखी थी।

अब्दुल्ला खां राज्य विधानसभा के लिये हुए चुनाव में 11 मार्च 2017 को समाजवादी पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। इस निर्वाचन को चुनौती देते हुये उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया था कि अब्दुल्ला खां के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और वीजा पर सपा नेता की जन्म तिथि एक जनवरी, 1993 दर्ज है।


उच्च न्यायालय ने अपने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया था कि निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को आगे की कार्रवाई के लिए इस फैसले से अवगत कराया जाए।

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