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सुप्रीम कोर्ट का आदेश- उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड जनता को बताएं पार्टियां

Thu, 13 Feb 2020 11:12 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 13 Feb 2020 11:12 AM IST
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SC directs political parties to upload on website reasons for selecting criminal candidates
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन के कारणों को अपलोड करें। अदालत ने यह फैसला इसलिए दिया है क्योंकि पिछले चार राष्ट्रीय चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है। शीर्ष अदालत का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को 48 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा। पार्टियों को चुनाव आयोग को 72 घंटे के भीतर ब्यौरा देना होगा।

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सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को अखबारों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अपनी वेबसाइट पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण बताते हुए वेबसाइट पर उनका परिचय पत्र, उपलब्धियां और उनके अपराध का विवरण प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है।
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उच्चतम न्यायालय का कहना है कि यदि राजनीतिक दल आदेश का पालन नहीं करते हैं तो वह अवमानना के उत्तरदायी होंगे। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा है कि यदि राजनीतिक पार्टियां आदेश का पालन करने में विफल रहती हैं तो वह अदालत में अवमानना याचिका दायर करे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन करने का कारण योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि जीतने के आधार पर। जीतने की काबिलियत तर्कसंगत नहीं हो सकता। अदालत ने यह फैसला वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनाया है।

अपराधीकरण पर जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, जानिए यहां

जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा आठ दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है। लेकिन ऐसे नेता जिन पर केवल मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ने के लिये स्वतंत्र हैं। भले ही उनके ऊपर लगा आरोप कितना भी गंभीर है।


जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(1) और (2) के अंतर्गत प्रावधान है कि यदि कोई विधायिका सदस्य (सांसद अथवा विधायक) हत्या, दुष्कर्म, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना, प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त होता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा और छह वर्ष की अवधि के लिये अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(3) में प्रावधान है कि उपर्युक्त अपराधों के अलावा किसी भी अन्य अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को यदि दो वर्ष से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से अयोग्य माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति सजा पूरी किए जाने की तारीख से छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। 

जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ(4) के अनुसार यदि दोषी सदस्य निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ तीन महीने के भीतर हाईकोर्ट में अपील दायर कर देता है तो वह अपनी सीट पर बना रह सकता है। हालांकि इस धारा को 2013 में ‘लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताकर निरस्त कर दिया था।

आरोपी नेताओं को टिकट पर न्यायालय के आदेश के दिन ही भाजपा ने उसकी धज्जियां उड़ा दीं: कांग्रेस

कांग्रेस ने आरोपी नेताओं को टिकट देने के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भाजपा ने कर्नाटक में जंगलों की कटाई के आरोपी को वन एवं वर्यावरण मंत्री बनाकर इस आदेश की आज ही धज्जियां उड़ा दीं।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि लो जी, मोदी जी ने तो आज ही आरोपित नेताओं को टिकट देने के कारण बताने के आदेशों की धज्जियां उड़ा दी। उच्चतम न्यायालय कहता है कि आरोपित नेताओं को टिकट ना दो। मोदी जी कहते हैं उन्हें विधायक नहीं, मंत्री बनाओ और वो भी उस विभाग का, जिसका क़ानून तोड़ने के लिए विधायक जी पर मुक़दमा दर्ज हो।’’

उन्होंने कर्नाटक में आनंद सिंह को वन एवं पर्यावरण मंत्री बनाए जाने का हवाला देते हुए कहा कि कहते थे कि ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’, लेकिन जिस पर जंगल काटने और अवैध खनन के मुक़दमे दर्ज हैं, उसे ही ‘वन एवं पर्यावरण’ विभाग का मंत्री बनाऊंगा। पहले खाद्य आपूर्ति मंत्री बनाया, फिर 24 घंटे में ही वन एवं पर्यावरण मंत्री। बिल्ली को दूध की रखवाली, वाह मोदी जी! उच्चतम न्यायालय के आदेश की कौन परवाह करता है?

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