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अदालत की निगरानी में नहीं होगी अगस्ता डील मामले की जांच: कोर्ट

Sat, 16 Jul 2016 03:30 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 16 Jul 2016 03:30 AM IST
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SC denies to probe Augusta deal under court Surveillance
augusta - फोटो : PTI

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे की जांच अदालत की निगरानी में कराने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। साथ ही केंद्र सरकार के जवाब से संतुष्ट शीर्ष अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह समेत अन्य नेताओं की सौदे में कथित भूमिका की जांच कराने की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया है।

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सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने शुक्रवार को जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है और वर्ष के अंत तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में वर्ष 2013 में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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इस वजह से अब याचिका का कोई मतलब नहीं है। बाद में मामले की जांच एसआईटी के हवाले कर दी गई। सरकार की दलीलों से संतुष्ट होकर पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया था। साथ ही पीठ ने याचिका में संवैधानिक पदों के बैठे लोगों पर की गई टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया।

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'किसी की भूमिका होगी तो कार्रवाई होगी'

SC denies to probe Augusta deal under court Surveillance
सुप्रीम कोर्ट

याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा ने पीठ के समक्ष कहा कि इटली की अदालत ने इस मामले में रिश्वत देने के आरोप में कुछ लोगों को दोषी ठहराया है। इस आदेश में कथित तौर पर कुछ भारतीयों का जिक्र है, लिहाजा उनके खिलाफ जांच की जानी चाहिए।

इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर इस मामले में किसी की भूमिका होगी तो उस पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता एमएल शर्मा को हालांकि यह इजाजत दी है कि अगर उन्हें भविष्य में ऐसा लगेगा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ सुबूत होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। 

याचिका में रक्षा मंत्रालय और सीबीआई को प्रतिवादी बनाते हुए कहा गया था कि इटली की अदालत द्वारा दिए गए फैसले में जिन भारतीयों के नाम हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया था कि अदालत की निगरानी में इस पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी या केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा कराई जाए।

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