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एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट: देश में निजी निवेश बढ़कर 56 लाख करोड़ हुआ, विनिर्माण क्षेत्र सबसे आगे
Mon, 08 Jun 2026 04:30 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 08 Jun 2026 04:30 AM IST
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- फोटो : AdobeStock
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देश में निजी क्षेत्र के निवेश को लेकर लंबे समय से चल रही चिंताओं के बीच एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र की निवेश घोषणाएं बढ़कर 56 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो 2024-25 के 37 लाख करोड़ से काफी अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि निजी क्षेत्र में पूंजीगत खर्च कम होने की चिंताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था में निवेश की रफ्तार बढ़ रही है।
कंपियां भविष्य को लेकर आशावादी
एसबीआई ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में कहा, विनिर्माण, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्तावों के चलते देश में कैपेक्स की रफ्तार तेज हुई है। निवेश घोषणाओं में यह उछाल दर्शाता है कि कंपनियां भविष्य की मांग और आर्थिक गतिविधियों को लेकर पहले से अधिक आशावादी नजर आ रही हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में अर्थव्यवस्था में कुल निवेश घोषणाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो व्यापार जगत के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। 2018-19 में निजी क्षेत्र का कुल निवेश 17 लाख करोड़ रुपये था। नए निवेश प्रस्तावों में विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है। 2025-26 की कुल निवेश घोषणाओं में इसकी हिस्सेदारी करीब 28.9 फीसदी रही। इसके बाद बिजली क्षेत्र का 28.7 फीसदी और बिल्डिंग बुनियादी ढांचे 23.1 फीसदी योगदान रहा। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश भविष्य में रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
जीडीपी आंकड़ों से भी मिला निवेश बढ़ने का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक जीडीपी के ताजा आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में तेजी की पुष्टि करते हैं। खासतौर पर, 2025-26 की चौथी तिमाही में निवेश की गति काफी मजबूत रही। अर्थव्यवस्था में निवेश का प्रमुख संकेतक माने जाने वाले सकल फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) में चौथी तिमाही के दौरान 10.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मजबूत निवेश माहौल को दर्शाती है।
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कंपनियां लगातार बढ़ा रहीं उत्पादक संपत्तियां
रिपोर्ट में निवेश के एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक ग्रॉस ब्लॉक (किसी कंपनी की ओर से खरीदी या बनाई गई सभी अचल संपत्तियों का कुल मूल्य) में हुई बढ़ोतरी पर भी प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 5,000 से अधिक सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों का कुल ग्रॉस ब्लॉक मार्च, 2022 के 87 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च, 2026 तक 145 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने पिछले पांच वर्षों में हर साल औसतन 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उत्पादक संपत्तियां जोड़ी हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सिर्फ निवेश घोषणाएं ही नहीं, बल्कि जमीन पर संपत्ति निर्माण और क्षमता विस्तार भी लगातार जारी है।
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कंपियां भविष्य को लेकर आशावादी
एसबीआई ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में कहा, विनिर्माण, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्तावों के चलते देश में कैपेक्स की रफ्तार तेज हुई है। निवेश घोषणाओं में यह उछाल दर्शाता है कि कंपनियां भविष्य की मांग और आर्थिक गतिविधियों को लेकर पहले से अधिक आशावादी नजर आ रही हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में अर्थव्यवस्था में कुल निवेश घोषणाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो व्यापार जगत के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। 2018-19 में निजी क्षेत्र का कुल निवेश 17 लाख करोड़ रुपये था। नए निवेश प्रस्तावों में विनिर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है। 2025-26 की कुल निवेश घोषणाओं में इसकी हिस्सेदारी करीब 28.9 फीसदी रही। इसके बाद बिजली क्षेत्र का 28.7 फीसदी और बिल्डिंग बुनियादी ढांचे 23.1 फीसदी योगदान रहा। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश भविष्य में रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
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जीडीपी आंकड़ों से भी मिला निवेश बढ़ने का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक जीडीपी के ताजा आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में तेजी की पुष्टि करते हैं। खासतौर पर, 2025-26 की चौथी तिमाही में निवेश की गति काफी मजबूत रही। अर्थव्यवस्था में निवेश का प्रमुख संकेतक माने जाने वाले सकल फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (जीएफसीएफ) में चौथी तिमाही के दौरान 10.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मजबूत निवेश माहौल को दर्शाती है।
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कंपनियां लगातार बढ़ा रहीं उत्पादक संपत्तियां
रिपोर्ट में निवेश के एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक ग्रॉस ब्लॉक (किसी कंपनी की ओर से खरीदी या बनाई गई सभी अचल संपत्तियों का कुल मूल्य) में हुई बढ़ोतरी पर भी प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 5,000 से अधिक सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों का कुल ग्रॉस ब्लॉक मार्च, 2022 के 87 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च, 2026 तक 145 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने पिछले पांच वर्षों में हर साल औसतन 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उत्पादक संपत्तियां जोड़ी हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सिर्फ निवेश घोषणाएं ही नहीं, बल्कि जमीन पर संपत्ति निर्माण और क्षमता विस्तार भी लगातार जारी है।