पीएम मोदी की अपील के बाद SBI समेत इन बड़े बैंकों ने सस्ता किया कर्ज
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पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से गरीबों और निम्न आय वर्ग के लोगों को कर्ज देने में तवज्जो देने की अपील के बाद बैंकों ने ब्याज दरें घटाने की शुरुआत कर दी है। सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अलावा पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने ब्याज दरें घटा दी हैं।
एसबीआई ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स पर आधारित दर यानी एमसीएलआर घटाने का ऐलान किया है। बैंक ने अलग-अलग अवधि के कर्ज के लिए इसमें 0.9 फीसदी की कटौती की है। लिहाजा एक साल की अवधि के लिए ब्याज दर 8.90 फीसदी से घटा कर 8 फीसदी कर दी गई है। दो साल के कर्ज के लिए ब्याज दर 8.10 और तीन साल के लिए यह 8.15 फीसदी होगी। एक महीने, तीन महीने और छह महीने के कर्ज के लिए भी ब्याज दर 0.9 फीसदी घटा दी गई है।
एसबीआई की ओर से ब्याज दरें घटाने के बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक ने भी एमसीएलआर में कटौती कर दी है। पंजाब नेशनल बैंक नवंबर से अब तक एमसीएलआर में 0.85 फीसदी की कटौती कर चुका है। बैंक ने एक साल का एमसीएलआर 0.7 फीसदी घटा कर 8.45 फीसदी कर दिया है। पहले यह 9.15 फीसदी था। यह दर तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसी तरह तीन और पांच साल का एमसीएलआर क्रमश: 8.60 और 8.75 फीसदी निर्धारित किया गया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी एक साल का एमसीएलआर 0.65 फीसदी घटा कर 8.65 फीसदी कर दिया है।
ब्याज दरों में कटौती से वित्तीय स्थिति पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा
गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद लोगों की ओर से जमा नकदी की वजह से बैंकों की तरलता की स्थिति काफी अच्छी है। इसलिए ब्याज दरों में कटौती से उनकी वित्तीय स्थिति पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने भाषण में बैंकों से गरीबों और निम्न आय वर्ग के लोगों की जरूरतों पर खास ध्यान देने की अपील की थी। पीएम ने कहा था कि वह बैंकों की स्वायत्तता का आदर करते हुए हैं और उनसे गरीबों, निम्न मध्य वर्ग और मध्य वर्ग के लोगों की जरूरतों पर ध्यान देने की अपील करते हैं। उन्होंने कहा था, देश पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के तौर पर मना रहा है। ऐसे में बैंकों को गरीबों की मदद करने का यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। बैंकों को लोगों के हित में तुरंत फैसले लेने चाहिए।
क्या है एमसीएलआर?
पिछले साल जून से बैंकों ने नए ग्राहकों के लिए ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए बेस रेट सिस्टम को हटा कर फंड के मार्जिनल कॉस्ट पर आाधारित फॉर्मूला को अपना लिया। अब बैंकों के लिए कर्ज की दरें तय करने का यही बेंचमार्क है। यह कर्ज के मार्जिनल कॉस्ट और बैंकों की नेटवर्थ पर हासिल रिटर्न के आधार पर तय होता है। आरबीआई ने बैंकों और ग्राहकों दोनों के लिए उचित ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए यह फॉर्मूला दिया था।