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सरदारपुरा दंगा: हाईकोर्ट में 17 की उम्रकैद बरकरार, 14 बरी

Fri, 21 Oct 2016 06:45 AM IST
एजेंसी/अहमदाबाद
एजेंसी/अहमदाबाद Updated Fri, 21 Oct 2016 06:45 AM IST
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Sardarpura riots: 17 Convicts's life sentence intact
- फोटो : indian express

गुजरात उच्च न्यायालय ने 2002 में हुए गोधरा कांड के बाद हुए सरदारपुरा नरसंहार मामले में निचली अदालत से दोषी करार 31 में से 17 आरोपियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है, जबकि अन्य 14 लोगों को बरी कर दिया। इस दंगे में 33 लोगों को जिंदा जला दिया गया था।

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उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति हर्षा देवानी और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने अपने फैसले में 17 आरोपियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। 
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सत्र न्यायालय द्वारा पूर्व में दोषी ठहराए गए 31 में से 14 लोगों को पर्याप्त सबूत के अभाव में और गवाहों के विरोधाभासी बयानों के चलते उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया। सरदारपुरा मामले में पुलिस ने 76 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से दो की जांच के दौरान मौत हो गई थी और एक नाबालिग था। 
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जून 2009 में कोर्ट ने 73 आरोपियों पर आरोप तय किए थे और उनके खिलाफ सुनवाई शुरू की थी। निचली अदालत ने सुनवाई के बाद 31 लोगों को दोषी मानते हुए बाकी 42 लोगों को बरी कर दिया था। बाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 42 में से 31 लोगों के बरी किए जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। 

नरसंहार में हुई थी 22 महिलाओं समेत 33 की मौत

Sardarpura riots: 17 Convicts's life sentence intact

हालांकि उच्च न्यायालय ने 42 में से 31 लोगों को बरी करने के मेहसाणा जिला न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। इसी बीच उच्च न्यायालय ने 17 लोगों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया। 

उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत की गई साजिश की कहानी को स्वीकार नहीं करने के निचली अदालत के फैसले को भी बरकरार रखा। अभियोजन पक्ष की तरफ से यह दलील दी गई थी कि अल्पसंख्यकों पर हमला पूर्वनियोजित था जो गोधरा हत्याकांड के बाद साजिश के तहत किया गया था। 

गौरतलब है कि सरदारपुरा नरसंहार में भीड़ ने 28 फरवरी और 1 मार्च की रात को एक घर में पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी थी जिसमें 22 महिलाओं समेत 33 लोगों की जलने से मौत हो गई थी। 

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