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'ईडी से कराएं जांच, कहां गए 500 करोड़?': संजय राउत ने जरांगे के मामले में शाह को लिखा पत्र, की और क्या मांग?
Mon, 26 Oct 2026 12:08 PM IST
अमन मौर्या
आईएएनएस, मुंबई, महाराष्ट्र
आईएएनएस, मुंबई, महाराष्ट्र
Published by: अमन मौर्या
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:08 PM IST
सार
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मनोज जरांगे के 500 करोड़ रुपये के भुगतान के दावों की ईडी और महाराष्ट्र पुलिस से उच्च-स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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संजय राउत, सांसद, शिवसेना यूबीटी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और महाराष्ट्र पुलिस से तुरंत उच्च-स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) लागू करने की भी अपील की है। यह मांग मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा 500 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर किए गए चौंकाने वाले खुलासों के बाद की गई है।
ये भी पढ़ें: मनोज जरांगे का बड़ा बयान: 500 करोड़ वाली ऑडियो क्लिप असली, सच छिपाने की हो रही कोशिश; सरकार से क्या मांग की?
कहां गायब हुए 500 करोड़ रुपये?
राउत ने बताया कि मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 20 अक्तूबर को आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में भाजपा की कोर टीम के नेताओं से 500 करोड़ रुपये लिए थे। कथित तौर पर, यह रकम डॉ. श्रीकांत शिंदे (सांसद और एकनाथ शिंदे के बेटे) के जरिए जरांगे पाटिल को दी जानी थी, ताकि 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले उनके आंदोलन को शांत किया जा सके। हालांकि, राउत ने इस बात पर जोर दिया कि यह पैसा कभी जारांगे पाटिल तक पहुंचा ही नहीं, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर 500 करोड़ रुपये कहां गायब हो गए। मामले पर मनोज जरांगे ने एक ऑडियो क्लिप भी जारी की है, जिसे राउत ने एक स्पष्ट सबूत बताया है।
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क्या है 2021 का हाई प्रोफाइल मामला?
राज्य में पहले हुई हाई-प्रोफाइल वित्तीय जांचों का जिक्र करते हुए, राउत ने याद दिलाया कि मार्च 2021 में जब मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखने का आरोप लगाया था, तब ईडी ने बहुत तेजी से कार्रवाई की थी, जबकि उस समय शुरुआती सबूतों की भी कमी थी।
राउत का तर्क है कि जरांगे के ऑडियो सबूतों के साथ लगाए गए मौजूदा आरोप कहीं अधिक गंभीर हैं। इसमें 500 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम शामिल है और यह साफ तौर पर 'मनी लॉन्ड्रिंग' (धन शोधन) के एक मामले की ओर इशारा करता है। राउत ने अपने दो पन्नों के पत्र में केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया है कि वे महाराष्ट्र पुलिस और ईडी को 500 करोड़ रुपये की धनराशि के स्रोत की गहन जांच करने और इसके रास्ते का पता लगाने का निर्देश दें। साथ ही, यह भी पता लगाएं कि भाजपा के वरिष्ठ नेता, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डॉ. श्रीकांत शिंदे इस बड़े वित्तीय घोटाले से कैसे जुड़े हैं। उन्होंने मांग की है कि इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
ये भी पढ़ें: केरलम: पूर्व राज्यपाल ने की पीएससी चेयरमैन को हटाने की सिफारिश, राष्ट्रपति को लिखे पत्र में क्या आरोप लगाया?
अमित शाह से क्या अपील की?
अपनी एक्स पोस्ट में राउत ने कहा, 'महाराष्ट्र का 500 करोड़ रुपये का मामला अब तक आप तक पहुंच ही गया होगा। अब तक भाजपा सांसदों, विधायकों, राजनीतिक दलों और चुनावों को खरीदती रही है। अब उसने आंदोलनों को खरीदना भी शुरू कर दिया है। भाजपा ने श्रीकांत शिंदे को पैसे दिए, ताकि मनोज जारांगे पाटिल को 500 करोड़ रुपये दिए जा सकें। यह पैसा कहां से आया? और क्या यह वास्तव में जारांगे तक पहुंचा या नहीं? यह मामला 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के अंतर्गत आता है। कृपया इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप दें।'
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कहां गायब हुए 500 करोड़ रुपये?
राउत ने बताया कि मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 20 अक्तूबर को आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में भाजपा की कोर टीम के नेताओं से 500 करोड़ रुपये लिए थे। कथित तौर पर, यह रकम डॉ. श्रीकांत शिंदे (सांसद और एकनाथ शिंदे के बेटे) के जरिए जरांगे पाटिल को दी जानी थी, ताकि 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले उनके आंदोलन को शांत किया जा सके। हालांकि, राउत ने इस बात पर जोर दिया कि यह पैसा कभी जारांगे पाटिल तक पहुंचा ही नहीं, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर 500 करोड़ रुपये कहां गायब हो गए। मामले पर मनोज जरांगे ने एक ऑडियो क्लिप भी जारी की है, जिसे राउत ने एक स्पष्ट सबूत बताया है।
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क्या है 2021 का हाई प्रोफाइल मामला?
राज्य में पहले हुई हाई-प्रोफाइल वित्तीय जांचों का जिक्र करते हुए, राउत ने याद दिलाया कि मार्च 2021 में जब मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखने का आरोप लगाया था, तब ईडी ने बहुत तेजी से कार्रवाई की थी, जबकि उस समय शुरुआती सबूतों की भी कमी थी।
राउत का तर्क है कि जरांगे के ऑडियो सबूतों के साथ लगाए गए मौजूदा आरोप कहीं अधिक गंभीर हैं। इसमें 500 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम शामिल है और यह साफ तौर पर 'मनी लॉन्ड्रिंग' (धन शोधन) के एक मामले की ओर इशारा करता है। राउत ने अपने दो पन्नों के पत्र में केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया है कि वे महाराष्ट्र पुलिस और ईडी को 500 करोड़ रुपये की धनराशि के स्रोत की गहन जांच करने और इसके रास्ते का पता लगाने का निर्देश दें। साथ ही, यह भी पता लगाएं कि भाजपा के वरिष्ठ नेता, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डॉ. श्रीकांत शिंदे इस बड़े वित्तीय घोटाले से कैसे जुड़े हैं। उन्होंने मांग की है कि इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
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अमित शाह से क्या अपील की?
अपनी एक्स पोस्ट में राउत ने कहा, 'महाराष्ट्र का 500 करोड़ रुपये का मामला अब तक आप तक पहुंच ही गया होगा। अब तक भाजपा सांसदों, विधायकों, राजनीतिक दलों और चुनावों को खरीदती रही है। अब उसने आंदोलनों को खरीदना भी शुरू कर दिया है। भाजपा ने श्रीकांत शिंदे को पैसे दिए, ताकि मनोज जारांगे पाटिल को 500 करोड़ रुपये दिए जा सकें। यह पैसा कहां से आया? और क्या यह वास्तव में जारांगे तक पहुंचा या नहीं? यह मामला 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के अंतर्गत आता है। कृपया इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंप दें।'