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Samwad 2026: 'मैंने तो बस गीत लिखे हैं, खारे-खारे पानी से'; संवाद में बोले शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम
Wed, 24 Jun 2026 02:10 PM IST
Jyoti Bhaskar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Wed, 24 Jun 2026 02:10 PM IST
सार
Samwad 2026: अमर उजाला संवाद उत्तराखंड के मंच पर आज जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने देश की सनातन संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संत की परिभाषा भी बताई। उन्होंने राजनीति और धर्म में अध्यात्म से जुड़ी विभूतियों के बीच संबंध की मर्यादा पर भी बात की। जानिए चर्चा के दौरान और किन विषयों पर बात हुई।
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अमर उजाला के मंच पर शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्रम महाराज
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमर उजाला संवाद उत्तराखंड के मंच पर आज जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम भी पहुंचे। उन्होंने चर्चा की शुरुआत में काव्यात्मक लहजे में कहा कि संत के राजनीतिक सरोकार नहीं होते। उन्होंने कहा, 'मैंने तो बस गीत लिखे हैं, खारे-खारे पानी से'।
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पत्रकारिता के मानदंड पर क्या बोले शंकराचार्य?
स्वामी राजराजेश्वराश्रम (Jagadguru Shankaracharya Swami Rajrajeshwarashram) ने संत की परिभाषा भी बताई। चर्चा के दौरान उन्होंने मौजूदा दौर में पत्रकारों की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि ऐसी दोधारी तलवार पर वही चल सकता है जो साहसी हो। उन्होंने अमर उजाला को पत्रकारिता के मानदंड स्थापित करने के लिए साधुवाद भी दिया।
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संत की परिभाषा और राजनेताओं को लेकर क्या कहा?
शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने अमर उजाला संवाद के दौरान समाज और धर्म से जुड़े अन्य प्रश्नों पर भी बेबाकी से जवाब दिए। उन्होंने संत की परिभाषा देते हुए कहा कि संत निष्क्रिय नहीं होता। संत वह है जिसके पास कुछ नहीं है और वह समाज की विसंगतियों पर निडर होकर बोलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं ने संतों को नपुंसक बना दिया है।
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धर्म के क्षेत्र में कैसा काम कर रही सरकार, चिंता के कारण क्या?
बीते कुछ वर्षों में देश में अयोध्या के राम मंदिर, वाराणसी में बने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर जैसे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा, उत्तराखंड में चारधाम के लिए भी सड़कें बन रही हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने चिंता को रेखांकित करते हुए कहा, भारत की मूल आध्यात्मिक आत्मा कहीं खो गई है। इसे पुनः ढूंढने और स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने राजनेताओं पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सर्कस के नकली शेर और भालू जैसी संज्ञाओं का भी इस्तेमाल किया और कहा कि इस देश का कोई भी नेता ठीक नहीं है, सब नकली हैं।
अयोध्या के चंदा विवाद और मौजूदा समय के हनुमंत चरित्र पर क्या हैं विचार?
शंकराचार्य ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी चंदा विवाद की खबरों पर अपना आक्रोश भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम जीवित रहते अपनी पत्नी सीता की चोरी नहीं रोक पाए थे। तब हनुमान, सुग्रीव और अन्य वीरों की सहायता लेनी पड़ी थी। आज उन्हें समाज में कोई हनुमान दिखाई नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तो सब पहलवान ही पहलवान दिख रहे हैं, जामवंत भी नहीं हैं।
पत्रकारिता का मिशन
शंकराचार्य ने अमर उजाला की पत्रकारिता की विशेष सराहना की। उन्होंने विष्णु राव पराड़कर और गणेश शंकर विद्यार्थी की महान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारिता एक मिशन और विजन है, केवल प्रमाणपत्र से नहीं बनती। पत्रकारिता, धर्माचार्य और राजनेता खून देने के लिए बने हैं, खून पीने के लिए नहीं। उन्होंने जोर दिया कि पत्रकार को पराड़कर जैसा भूखा रहना पड़ता है। मौजूदा दौर के प्रलोभनों की भरमार पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि रबड़ी रसगुल्ले खाने वाले भाट बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने अमर उजाला के मंच से क्या कहा?
धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के अलावा भारत की सनातन परंपरा पर विस्तृत चर्चा से पहले अमर उजाला संवाद के मंच पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, अध्यात्मिक और प्रेरक वक्ता देवी चित्रलेखा, हाल ही में आई फिल्म धुरंधर से विशेष लोकप्रियता हासिल करने वाले अभिनेता राकेश बेदी के साथ भी अलग-अलग विषयों पर विस्तार से बातें हुई।
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2027 में हरिद्वार के कुंभ पर सरकार की तैयारियां कैसी?
इन विषयों के अलावा सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक इस्तेमाल और सतत विकास को लेकर अपनाई जाने वाली नीतियों पर भी चर्चा हुई। हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ को लेकर सरकार क्या तैयारियां कर रही है, देवभूमि पर होने वाले इस आयोजन की धार्मिक-सांस्कृतिक अहमियत क्या है इन पहलुओं पर भी उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन और जूना अखाड़ा के प्रेम गिरि महाराज की मौजूदगी में चर्चा हुई।