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सपा से निकाले सीएम: मुलायम के इस कठोर दांव से विरोधियों में 'दंगल'

Fri, 30 Dec 2016 08:42 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Dec 2016 08:42 PM IST
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Samajwadi Party tussle brings Strategy crisis for Other Parties

मुलायम परिवार में जारी सत्ता संघर्ष से खुद सपा ही नहीं उलझी है, बल्कि इस पार्टी ने अपने विरोधियों को भी बुरी तरह उलझा दिया है। सपा विरोधी सभी दल सांस थामे मुलायम परिवार में नए सिरे से शुरू हुए महाभारत के अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सपा सुप्रीमो द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद अब भाजपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद को अखिलेश के भावी कदम का इंतजार है।

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कांग्रेस और रालोद को जहां अब अखिलेश की अगुवाई वाले धड़े से गठबंधन की उम्मीद है, वहीं भाजपा ने स्वीकार किया है कि अगर इस गठबंधन में मूर्त रूप लिया तो उसे अपनी चुनावी रणनीति में आमूलचूल बदलाव लाना होगा।
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भाजपा ने फिलहाल नए सिरे से छिड़े महाभारत के परिणाम आने के बाद ही टिकट वितरण का सिलसिला शुरू करने का मन बनाया है। जबकि कांग्रेस को इस परिस्थिति में सपा, अखिलेश के साथ तीन दलों के गठबंधन के मूर्त रूप लेने की उम्मीद है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश लगातार सपा सुप्रीमो पर कांग्रेस के साथ गठबंधन का दबाव बनाते रहे हैं।

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सियासी दलों को सपा का संघर्ष थमने का इंतजार

Samajwadi Party tussle brings Strategy crisis for Other Parties

भाजपा के एक वरिष्ठ महासचिव के अनुसार सपा में नए सिरे से शुरू हुई महाभारत से सभी दलों का चौकन्ना होना स्वाभाविक है। स्वाभाविक इसलिए कि सपा राज्य की सत्ताधारी पार्टी ही नहीं बल्कि भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी भी है। ऐसे में जाहिर तौर पर भाजपा तक तक अपनी चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप नहीं दे सकती, जब तक की सपा की खींचतान को अंतिम परिणाम सामने ना आ जाए।

अब जबकि मुलायम ने मुख्यमंत्री और रामगोपाल को पार्टी से निकाल दिया है तब यह देखना होगा कि अखिलेश और मुलायम का अब भावी रुख क्या रहता है। पार्टी खुद जिन सवालों का जवाब पाना चाहती है उनमें मुख्य सवाल यह है कि क्या अखिलेश नई पार्टी गठन कर या सपा पर अपना दावा जता कर रालोद और कांग्रेस से गठबंधन करेंगे। दूसरा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री पद की कमान अब खुद मुलायम संभालेंगे। दोनों ही परिस्थितियों में पार्टी को न सिर्फ अपनी चुनावी रणनीति बदलनी होगी, बल्कि चुनावी मुद्दों की भी नए सिरे से समीक्षा करनी होगी।

दूसरी ओर कांग्रेस भी लगातार सपा के महाभारत पर निगाह रख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि सपा में बिखराव तय होने के बाद उसकी अखिलेश धड़े से गठबंधन की तमन्ना पूरी हो जाएगी। वह गठबंधन जिसे अंतिम समय में सपा सुप्रीमो ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। जबकि कांग्रेस की तरह शुरू से ही सपा सहित अन्य कई दलों से गठबंधन की नाकाम कोशिश कर चुके रालोद को भी इस महाभारत के अंत का इंतजार है।

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