फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   samajwadi party conflict

'चाचावाद' की चुनौती से परेशान भतीजा

Wed, 17 Aug 2016 03:40 PM IST
समीरात्मज मिश्र/ बीबीसी
समीरात्मज मिश्र/ बीबीसी Updated Wed, 17 Aug 2016 03:40 PM IST
विज्ञापन
samajwadi party conflict
- फोटो : BBC

उत्तर प्रदेश में जब से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, आरोप लगते रहे हैं कि अखिलेश सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं, सरकार तो 'चचा' लोग चला रहे हैं। 'चचा' यानी शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव।

विज्ञापन


लेकिन अब 'चचा' शिवपाल ही सरकार और पार्टी से इस कदर नाराज हो गए हैं कि उन्हें इस्तीफे की धमकी देनी पड़ी है। रविवार को मैनपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान बेहद भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि पार्टी और सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो इस्तीफा दे देंगे।
विज्ञापन


धमकी के अगले दिन जब पार्टी और परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव, बेटे अखिलेश की बजाय शिवपाल के साथ खड़े दिखे तो राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठने लगे। पार्टी दफ्तर में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह ने भी धमकी दे दी कि अगर वो और शिवपाल अलग हो गए तो सरकार के साथ पार्टी का कोई नहीं खड़ा मिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

इन घटनाओं के पीछे शिवपाल सिंह यादव का ही हाथ

samajwadi party conflict

मुलायम सिंह यादव पार्टी दफ्तर में जब ये बातें बोल रहे थे, उस समय कई मंत्रियों के अलावा सरकार के मुखिया अखिलेश भी मौजूद थे। दरअसल पार्टी में कई मोर्चे यानी ग्रुप होने की बातें अक्सर होती हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं से ये बातें जैसे प्रमाणित होने लगी हैं।

खासकर पार्टी में अमर सिंह की वापसी, राज्य सभा में टिकटों का बंटवारा, मुख्य सचिव दीपक सिंघल की नियुक्ति जैसी घटनाएं इस संदर्भ में काफी अहम हैं। आज शिवपाल यादव को इस्तीफे की धमकी भले ही देनी पड़ रही है, लेकिन इन घटनाओं के पीछे शिवपाल सिंह यादव का ही हाथ बताया गया। इन्हें पार्टी में अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव की कमजोरी भी बताया गया।

वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कहते हैं,'मुख्य सचिव से लेकर नौकरशाही के हर अहम पद पर शिवपाल यादव और नेताजी की पसंद के अधिकारी बैठे हैं। बिना इनकी मर्जी के पार्टी या सरकार में पत्ता तक नहीं हिलता। ऐसी स्थिति में इन्हें ये सब कहने की जरूरत कहां पड़ गई?' हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से सरकार की बुराई करना मुलायम सिंह की एक रणनीति हो सकती है।

लेकिन शिवपाल यादव का भी इस आलोचना में मुखर हो जाना सीधे तौर पर मतभेदों को ही उजागर करता है। वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं कि शिवपाल और अखिलेश में मतभेद कोई नई बात नहीं है, हर कोई इसे जानता है। लेकिन अब शिवपाल सार्वजनिक मंच से इस तरह की बातें करके उस स्थिति से बचना चाहते हैं कि अगर पार्टी हारे तो पूरा ठीकरा उनके माथे न फूटे, क्योंकि पार्टी में ज्यादातर फैसलों के पीछे उन्हीं की स्वीकृति रहती है।

कोई भी नेता सीधे तौर पर बोलने से कतरा रहा है

samajwadi party conflict

पार्टी में मतभेद के मामले में पार्टी का कोई भी नेता सीधे तौर पर बोलने से कतरा रहा है। लेकिन इस बात से पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता भी इनकार नहीं करते कि कार्यकर्ता और नेता मनमानी कर रहे हैं।समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक अशोक वाजपेयी कहते हैं कि नेताजी ने पार्टी को खड़ा किया है और शिवपाल यादव की भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ऐसे में यदि पार्टी की छवि कहीं से प्रभावित होती है तो इन लोगों को पीड़ा जरूर होगी। शिवपाल यादव ने सबसे अहम मसला जो उठाया, वो ये है कि उनकी पार्टी के लोग जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि इसके लिए सबसे ज्यादा शह सपा में किसी नेता ने यदि दी है, तो वो शिवपाल यादव ही हैं।

मथुरा में रामवृक्ष यादव को संरक्षण देने के आरोप भी उन पर लगे हैं। बहरहाल जानकार ये भी कहते हैं कि सरकार की आलोचना करना भले ही पार्टी और मुलायम सिंह की रणनीति हो, लेकिन जिन बातों की आलोचना वो कर रहे हैं, उनसे जनता भली-भांति वाकिफ है। ऐसी स्थिति में इस आलोचना का उन्हें खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed