{"_id":"5bdb2ec0bdec2253c9586dc4","slug":"s-gurumurthy-says-rbi-is-constantly-speaking-on-its-forum-in-dispute","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरबीआई विवाद में अपने फोरम पर लगातार बोल रहे हैं एस गुरुमूर्ति","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आरबीआई विवाद में अपने फोरम पर लगातार बोल रहे हैं एस गुरुमूर्ति
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:20 PM IST
विज्ञापन
rbi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में छिड़ा विवाद अभी लंबा चलेगा। यह विवाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के खुलकर बोलने के बाद सतह पर आया था। लेकिन सूत्र बताते हैं केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद भी समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद कम है। 23 अक्टूबर को रिजर्व बैंक के बोर्ड में मचा हंगामा अभी जारी है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंशकालिक निदेशक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति भी लगातार अपने फोरम पर बोल रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान गुरुमूर्ति ने कहा कि वह अपने फोरम पर अपनी बात पहुंचा रहे हैं। उन्हें इसकी तकलीफ है कि उन्होंने जो पत्र आरबीआई गवर्नर को लिखा था, उसकी प्रति अन्य निदेशकों को भी भेजी थी। उनके संस्कार मीडिया या किसी अन्य फोरम पर अभी बोलने की इजाजत नहीं देते, लेकिन किसी ने जानबूझकर इस पत्र को लीक किया।
वह विरल आचार्य ने जो किया गुरुमूर्ति का कहना है कि उन्होंने वहीं लिखा है। वह इसे रिजर्व बैंक के फोरम पर उठा रहे हैं और वहां से बाहर किसी से कोई बात नहीं करना चाहते। इस बीच स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर यदि सरकार के साथ तालमेल बनाकर और अनुशासन में काम नहीं कर सकते तो उन्हें पद से हट जाना चाहिए।
विज्ञापन
बरकरार है असहमति
रिजर्व बैंक के बोर्ड में असहमति की स्थिति बनी हुई है। बताते हैं आरबीआई के अधिकांश पूर्ण कालिक निदेशक न तो स्वामीनाथन गुरुमूर्ति की सलाह से इत्तेफाक रख रहे हैं और न ही सरकार की दखलंदाजी उन्हें रास आ रही है। गुरुमूर्ति चाहते हैं कि आरबीआई छोटे, मझोले और लघु उद्योंगों आदि के लिए ऋण लेने की प्रक्रिया को आसान करे, लेकिन आरबीआई बैंकों की स्थिति, एनपीए की हालत आदि को देखते हुए तैयार नहीं है। इसी तरह से तमाम अन्य मुद्दों को भी लेकर मतभेद है।
शुरू से सरकार का आरबीआई से तालमेल खराब
पूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन हों या वर्तमान में उर्जित पटेल से भी सरकार का तालमेल गड़बड़ा गया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इसके लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केन्द्र सरकार के कदम को सही ठहराया है। कुल मिलाकर सरकार और केंद्रीय बैंक जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था के बीच टकराव उचित नहीं माना जा रहा है।
कौन हैं स्वामीनाथन गुरुमूर्ति
तमिलनाडु राज्य के मध्यमवर्गीय परिवार में पले बढ़े एस गुरुमूर्ति पत्रकार और चार्टर्ड अकाऊंटेट हैं। उनकी उम्र कोई 27 साल थी जब इंडियन एक्सप्रेस के संस्थापक रामनाथ गोयनका के करीब आए थे। अपनी खोजी पत्रकारिता से बोफोर्स तोप घोटाले में सनसनी भी फैलाई थी। एस गुरुमूर्ति आरएसएस से ताल्लुक रखते हैं। अर्थशास्त्र पर अच्छी पकड़ है और आरएसएस के अनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच के कर्ताधर्ता रहे हैं।
गुरुमूर्ति के अटल जी की सरकार में लालकृष्ण आडवाणी से गहरे ताल्लुकात थे और आज भी हैं। 2013-14 में लाल कृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी खेमे के बीच में संवाद स्थापित करने से लेकर अन्य में गुरुमूर्ति की बड़ी भूमिका रही है। माना जाता है कि वह आज भी केंद्र सरकार के एक भारतीय चिंतक की छवि रखने वाले प्रभावी आर्थिक सलाहकार हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला से बातचीत के दौरान गुरुमूर्ति ने कहा कि वह अपने फोरम पर अपनी बात पहुंचा रहे हैं। उन्हें इसकी तकलीफ है कि उन्होंने जो पत्र आरबीआई गवर्नर को लिखा था, उसकी प्रति अन्य निदेशकों को भी भेजी थी। उनके संस्कार मीडिया या किसी अन्य फोरम पर अभी बोलने की इजाजत नहीं देते, लेकिन किसी ने जानबूझकर इस पत्र को लीक किया।
विज्ञापन
वह विरल आचार्य ने जो किया गुरुमूर्ति का कहना है कि उन्होंने वहीं लिखा है। वह इसे रिजर्व बैंक के फोरम पर उठा रहे हैं और वहां से बाहर किसी से कोई बात नहीं करना चाहते। इस बीच स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर यदि सरकार के साथ तालमेल बनाकर और अनुशासन में काम नहीं कर सकते तो उन्हें पद से हट जाना चाहिए।
विज्ञापन
बरकरार है असहमति
रिजर्व बैंक के बोर्ड में असहमति की स्थिति बनी हुई है। बताते हैं आरबीआई के अधिकांश पूर्ण कालिक निदेशक न तो स्वामीनाथन गुरुमूर्ति की सलाह से इत्तेफाक रख रहे हैं और न ही सरकार की दखलंदाजी उन्हें रास आ रही है। गुरुमूर्ति चाहते हैं कि आरबीआई छोटे, मझोले और लघु उद्योंगों आदि के लिए ऋण लेने की प्रक्रिया को आसान करे, लेकिन आरबीआई बैंकों की स्थिति, एनपीए की हालत आदि को देखते हुए तैयार नहीं है। इसी तरह से तमाम अन्य मुद्दों को भी लेकर मतभेद है।
शुरू से सरकार का आरबीआई से तालमेल खराब
पूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन हों या वर्तमान में उर्जित पटेल से भी सरकार का तालमेल गड़बड़ा गया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इसके लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केन्द्र सरकार के कदम को सही ठहराया है। कुल मिलाकर सरकार और केंद्रीय बैंक जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था के बीच टकराव उचित नहीं माना जा रहा है।
कौन हैं स्वामीनाथन गुरुमूर्ति
तमिलनाडु राज्य के मध्यमवर्गीय परिवार में पले बढ़े एस गुरुमूर्ति पत्रकार और चार्टर्ड अकाऊंटेट हैं। उनकी उम्र कोई 27 साल थी जब इंडियन एक्सप्रेस के संस्थापक रामनाथ गोयनका के करीब आए थे। अपनी खोजी पत्रकारिता से बोफोर्स तोप घोटाले में सनसनी भी फैलाई थी। एस गुरुमूर्ति आरएसएस से ताल्लुक रखते हैं। अर्थशास्त्र पर अच्छी पकड़ है और आरएसएस के अनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच के कर्ताधर्ता रहे हैं।
गुरुमूर्ति के अटल जी की सरकार में लालकृष्ण आडवाणी से गहरे ताल्लुकात थे और आज भी हैं। 2013-14 में लाल कृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी खेमे के बीच में संवाद स्थापित करने से लेकर अन्य में गुरुमूर्ति की बड़ी भूमिका रही है। माना जाता है कि वह आज भी केंद्र सरकार के एक भारतीय चिंतक की छवि रखने वाले प्रभावी आर्थिक सलाहकार हैं।