{"_id":"5b0adb5d4f1c1b926e8b4edf","slug":"s-400-missile-deal-between-india-and-russia","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-रूस के बीच हुआ 40 हजार करोड़ का एस-400 मिसाइल का सौदा, चीन को टक्कर देने की तैयारी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
भारत-रूस के बीच हुआ 40 हजार करोड़ का एस-400 मिसाइल का सौदा, चीन को टक्कर देने की तैयारी
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 27 May 2018 09:52 PM IST
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एस-400
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भारत ने वायु सेना के लिए रूस से एस-400 ट्रंफ हवाई रक्षा प्रणाली की खरीद के लिए कीमत संबंधी बातचीत पूरी कर ली है। यह पूरा सौदा करीब 40,000 करोड़ रुपये में तय हुआ है। इस सौदे की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि अब दोनों देश अमेरिका के कानून के प्रावधानों से बचने के तरीके तलाश रहे हैं। इन प्रावधानों के अनुसार रूस के रक्षा अथवा खुफिया प्रतिष्ठानों से लेन-देन करने वाले देशों और कंपनियों को दंड देने की बात कही गई है।
इस बातचीत में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि मिसाइल खरीद के लिए बातचीत पूरी हो चुकी है। वित्तीय पक्ष पर बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच अक्तूबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले की जा सकती है।
डवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसलिए दोनों पक्ष इस सौदे को अमेरिका के प्रतिबंधों से बचाने के रास्ते तलाश कर रहे हैं। माना जा रहा है यह मुद्दा प्रधानमंत्री की पिछले सप्ताह सोची में पुतिन से मुलाकात के दौरान उठा था। गौरतलब है कि भारत करीब 4000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है।
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- एस-300 का उन्नत संस्करण है एस-400 मिसाइल
- यह मिसाइल प्रणाली रूस में साल 2007 से सेवा में
- 400 किमी रेंज में एयरक्रॉफ्ट, विमान व ड्रोंस नष्ट करने में सक्षम
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इस बातचीत में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि मिसाइल खरीद के लिए बातचीत पूरी हो चुकी है। वित्तीय पक्ष पर बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच अक्तूबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले की जा सकती है।
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डवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसलिए दोनों पक्ष इस सौदे को अमेरिका के प्रतिबंधों से बचाने के रास्ते तलाश कर रहे हैं। माना जा रहा है यह मुद्दा प्रधानमंत्री की पिछले सप्ताह सोची में पुतिन से मुलाकात के दौरान उठा था। गौरतलब है कि भारत करीब 4000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है।
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- यह मिसाइल प्रणाली रूस में साल 2007 से सेवा में
- 400 किमी रेंज में एयरक्रॉफ्ट, विमान व ड्रोंस नष्ट करने में सक्षम