बूढ़े हो चले संघ को अब युवा कंधों का भरोसा
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अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा आरएसएस नवीनीकरण दिशा में कार्य कर रहा है। संघ की योजना है कि 21वीं सदी के युवा भारत में राष्ट्रवाद का भाव जगाकर संगठन से जोड़ा जाए, जिससे स्वयंसेवी संगठन के रूप में देश के प्रतिनिधित्व का कार्य जारी रहे। इसके लिए देश के बाल वर्ग को आरएसएस से जोड़ने का काम शुरू हो चुका है।
केशवधाम में चल रही बाल कार्य प्रमुखों की बैठक में पहुंचे संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2005 से संगठन को नवयौवन प्रदान करने की दिशा में प्रयासरत है। नई रणनीति के तहत देश के बाल वर्ग को संगठन से जोड़ने के साथ उन्हें आजीवन जोडे़ रखने पर भी कार्य किया जा रहा है।
आरएसएस का लक्ष्य है कि 2025 में जब संगठन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करे तो नई स्फूर्ति और ताकतवर संगठन के रूप में यह देश के सामने हो।
भैयाजी ने कहा कि 30 हजार तरुण, 12 हजार बुजुर्ग शाखाओं के साथ आरएसएस की कुल 57 हजार शाखाएं देश में कार्य कर रहीं हैं। इनमें देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के साथ भारत की संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहरों और राष्ट्रवादी विचारधारा को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में प्रयास जारी है।
उन्होंने कहा कि 2005 से ही दूरगामी सोच के साथ बूढे़ हो चले आरएसएस को नव यौवन के साथ ही विस्तारीकरण देने काम चल रहा है। अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वात रंजन ने बताया कि 1925 में राष्ट्रवादी संगठन के रूप में प्रारंभ हुए आरएसएस ने समय-समय पर राष्ट्र और समाज उत्थान के लिए अहम भूमिका अदा की है।
संघ आगे भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से देश सेवा के कार्य का निर्वहन करता रहेगा।