RSS: युवा प्रोफेशनल्स को जोड़ने के लिए शाखाओं का टाइम बदलेगा संघ, रोजगार बढ़ाने के लिए शुरू की ये पहल
RSS: संघ को इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि शाखाओं में नए लोगों की आमद कम है। पारंपरिक तौर पर सुबह और शाम को लगने वाली शाखाएं मोहल्ले के बच्चे और युवाओं की संख्या कम होती है। इसलिए अब छुट्टी वाले दिन एक घंटे उनसे संपर्क संवाद के लिए उन्हें शाखाओं में लाने की मुहिम शुरू की जा रही है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बदलाव के दौर से गुजर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने नेटवर्क की रीढ़ और नियमित लगने वाली शाखाओं के विस्तार के नए रोडमैप पर काम करना तेजी से शुरू कर दिया है। संघ ने कई राज्यों में अलग अलग क्षेत्रों में प्रोफेशनल्स को शाखाओं से जोड़ने के लिए उनकी सुविधा के समय पर शाखाओं को लगाने का फैसला किया है। डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, किसान और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए अब साप्ताहिक और पाक्षिक शाखाओं का प्रयोग भी शुरू किया जाएगा। संघ का लक्ष्य है कि अलग दो वर्षों में देश के सभी विकास खंडों तक शाखाएं पहुंच जाएं।
छुट्टी वाले दिन एक घंटे शाखा
दरअसल, संघ को इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि शाखाओं में नए लोगों की आमद कम है। पारंपरिक तौर पर सुबह और शाम को लगने वाली शाखाएं मोहल्ले के बच्चे और युवाओं की संख्या कम होती है। इसलिए अब कामकाजी युवाओं को जोड़ने के उद्देश्य से जब उन्हें समय हो या अथवा छुट्टी वाले दिन एक घंटे उनसे संपर्क संवाद के लिए उन्हें शाखाओं में लाने की मुहिम शुरू की जा रही है। इस बाद विचारधारा के बातें होगी। संघ के जुड़े सूत्रों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान अथवा किसी मैदान में आदि पर संघ की शाखा से आशय परस्पर मेल जोल से होता है। एक घंटे की इस मेल मुलाकात के दौरान बौद्धिक और शारीरिक गतिविधियां भी जुड़ जाती हैं। इसके अलावा इसमें खेल, योग, वंदना और सांस्कृतिक मुद्दों पर विचार विमर्श भी शामिल रहता है।
देशभर में करीब 60 हजार से ज्यादा संघ की शाखाएं हैं। अब संघ शताब्दी वर्ष में ज्यादा से ज्यादा नए लोगों को जोड़ने की कवायद में जुटा हुआ है। दक्षिण के राज्य कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल में आईटी प्रोफेशनल्स और अन्य कामकाजी लोगों के लिए यह प्रयोग शुरू हो चुका है। इन राज्यों में इस नवाचार को अच्छा रिस्पांस भी मिला है। अब इसी को देखते हुए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर भारत के कई राज्यों में भी नियमित तौर शाखाएं मिलन समारोह के तौर शुरू की जाएगी।
रोजगार बढ़ाने पर भी संघ की पहल
इधर, नागपुर विजयादशमी के मौके पर दशहरा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में आर्थिक और विकास नीति रोजगार उन्मुख हो यह अपेक्षा स्वाभाविक की जाती है। लेकिन रोजगार यानी केवल नौकरी नहीं यह समझदारी समाज में भी बढ़ानी पड़ेगी। कोई काम प्रतिष्ठा में छोटा या हल्का नहीं है, परिश्रम, पूंजी तथा बौद्धिक श्रम सभी का महत्व समान है। हमें उद्यमिता की ओर जाने वाली प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन देना होगा।
प्रत्येक जिले में रोजगार प्रशिक्षण की विकेंद्रित योजना बने। युवा अपने जिले में ही रोजगार प्राप्त हो सकें। गांवों में विकास के कार्यक्रम से शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात आदि सुविधाए सुलभ हो जाएं, यह अपेक्षा सरकार से तो रहती ही है। लेकिन कोरोना काल के दौरान कार्यरत रहने वाले कार्यकर्ताओं ने यह भी अनुभव किया है कि समाज का संगठित बल भी बहुत कुछ कर सकता है। आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठन, लघु उद्यमी, कुछ सम्पन्न सज्जन, कला कौशल के जानकार, प्रशिक्षक तथा स्थानीय स्वयंसेवकों ने लगभग 275 जिलों में स्वदेशी जागरण मंच के साथ मिलकर यह प्रयोग प्रारम्भ किया है। इस प्रारंभिक अवस्था में ही रोजगार सृजन में उल्लेखनीय योगदान देने में सफल हुए हैं, ऐसी जानकारी मिल रही है।