एमजी वैद्य: आठ दशक में संघ के हर उतार चढ़ाव के बने साक्षी
- संघ के स्वयंसेवक से पहले प्रचार प्रमुख तक के सफर में देखे कई रंग
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विस्तार
माधव गोविंद वैद्य ने 97 की उम्र में शनिवार को अंतिम सांस ली। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के करीब दो दशक बाद 1943 में स्वयंसेवक के तौर पर संघ से जुड़े। वह उस वक्त नागपुर के मोरिस कॉलेज में थे। स्वयंसेवक से पहले प्रचार प्रमुख तक के सफर में उन्होंने कई रंग देखे। संघ में करीब आठ दशक की यात्रा के दौरान वैद्य कई उतार चढ़ाव के साक्षी बने। उनका जन्म वर्धा जिले की तरोडा तहसील में हुआ था।
वैद्य ने संघ के तीन प्रतिबंध देखे, अलगाव, राजनीति में शामिल होने पर अंदरूनी संघर्षों के गवाह बने और संघ के भीतर की हलचल व पुनरुत्थान को भी करीब से देखा। इसके साथ ही संघ के भाजपा के साथ बदलते सत्ता समीकरण और 2014 में केंद्र में सत्ता का तूफान इन सब पहलुओं को वैद्य ने करीब से देखा और परखा। वे एक सफल पत्रकार रहे और नागपुर से छपने वाले संघ के मराठी दैनिक ‘तरुण भारत’ के प्रमुख संपादक भी रहे। वह संघ के पहले प्रचार प्रमुख बने और संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख भी रहे। वैद्य एमए में गोल्डमेडलिस्ट रहे और 1949 -1966 तक नागपुर के हिसलप कॉलेज में पढ़ाया। इसी दौरान वे संघ से जुड़ चुके थे। 1966 में वह तरुण भारत के संपादकीय विभाग से जुड़े और 25 वर्षों तक उन्होंने तरुण भारत में कॉलम लिखा। इसके अलावा उन्होंने कई किताबें लिखीं। 1978 से 1984 तक वैद्य महाराष्ट्र विधान परिषद के मनोनीत सदस्य थे और नागपुर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य भी रहे।
सभी छह सर संघचालकों के साथ किया काम
एमजी वैद्य ने आरएसएस के संस्थापक केशव बलीराम हेडगेवार समेत सभी छह सर संघचालकों के साथ काम किया। उनके परिवार में पत्नी सुनंदा, तीन बेटियां और मौजूदा सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य समेत पांच बेटे हैं।
महाराष्ट्र को बांटने की मांग पर विवाद भी हुआ
एमजी वैद्य इस वर्ष जनवरी में महाराष्ट्र को चार हिस्सों में बांटने की मांग को लेकर विवादों में भी रहे। उनकी इस मांग को लेकर उन पर कई धड़ों से उनकी आलोचना भी हुई।
पीएम मोदी ने जताया दुख
एमजी वैद्य के निधन पर पीएम मोदी ने दुख जताते हुए कहा कि श्री एमजी वैद्य एक प्रतिष्ठित लेखक और पत्रकार थे। उन्होंने दशकों तक आरएसएस में बड़े पैमाने पर योगदान दिया। उन्होंने भाजपा को मजबूत करने के लिए भी काम किया। उनके निधन से मैं बहुत दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। शांति।
Shri MG Vaidya Ji was a distinguished writer and journalist. He contributed extensively to the RSS for decades. He also worked to strengthen the BJP. Saddened by his demise. Condolences to his family and admirers. Om Shanti.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 19, 2020
भावभीनी श्रद्धांजलि, संघ ने खो दिया बुजुर्ग
‘एमजी वैद्य बहुमुखी प्रतिभा और एक शानदार पत्रकार थे। वह एक बुद्धिजीवी विचारक थे। आज संघ परिवार ने अपने एक बुजुर्ग को खो दिया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।’
-डॉ मोहन भागवत, सर संघचालक
संघ के विचारों को दी दिशा
‘एमजी वैद्य जी के निधन की सूचना मिली, वह 100 वर्ष जरूर पूरे कर सकते थे लेकिन शायद ईश्वर की यही मर्जी थी। संघ के विचारों को दिशा देने वाले महान विचारक को नमन।’
- नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री
ईश्वर श्री चरणों में जगह दे
‘संघ परिवार के महान विचारक एमजी वैद्य के निधन से दुखी हूं। उन्होंने संघ में अहम भूमिका निभाई और हमेशा अपने बुद्धिजीवी विचारों से संगठन का मार्ग दर्शन किया। ईश्वर दिवंगत आत्मा को श्री चरणों में जगह दे और परिवार को इस मुश्किल समय में हिम्मत दे। ओम शांति।
- विजय रूपाणी, मुख्यमंत्री गुजरात
उनके पोते विष्णु वैद्य ने बताया कि दोपहर 3.35 बजे एक निजी अस्पताल में उनका निधन हुआ । विष्णु वैद्य ने बताया कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे, लेकिन बाद में ठीक हो गए थे। उनका स्वास्थ्य शुक्रवार को अचानक बिगड़ गया।
बता दें कि उन्होंने 11 मार्च को नागपुर में अपना 97 वां जन्मदिन मनाया था। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत, नितिन गडकरी आदि मौजूद रहे थे।