{"_id":"63a33e9df095147b871d24c8","slug":"rss-chief-says-social-inequality-exists-because-we-mistook-adharma-for-dharma-for-2000-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: अधर्म को धर्म समझने से सामाजिक असमानता बरकरार, प्रमुखस्वामी शताब्दी समारोह में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: अधर्म को धर्म समझने से सामाजिक असमानता बरकरार, प्रमुखस्वामी शताब्दी समारोह में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत
Wed, 21 Dec 2022 10:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 21 Dec 2022 10:43 PM IST
सार
संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को समरसता का उपदेश देने के बजाय इसे प्रमुखस्वामी महाराज की तरह दैनिक जीवन में अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपने परिवार, धन, रूप या शारीरिक शक्ति के बारे में झूठा गर्व लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि वे दूसरों से श्रेष्ठ हैं।
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि 2000 वर्षों तक लोग अधर्म को ही धर्म मानते रहे, इसलिए अभी भी समाज में असमानता बनी हुई है। अन्यथा, धर्म में तो यह अवधारणा ही नहीं कि कौन श्रेष्ठ है और कौन निम्न।भागवत यहां प्रमुखस्वामी महाराज नगर में बोल रहे थे, जिसे बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के प्रमुखस्वामी शताब्दी समारोह के लिए 600 एकड़ में स्थापित किया गया है। प्रमुखस्वामी महाराज 95 वर्ष की उम्र में अगस्त 2016 में ब्रह्मलीन हुए थे।
विज्ञापन
संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को समरसता का उपदेश देने के बजाय इसे प्रमुखस्वामी महाराज की तरह दैनिक जीवन में अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपने परिवार, धन, रूप या शारीरिक शक्ति के बारे में झूठा गर्व लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि वे दूसरों से श्रेष्ठ हैं।
विज्ञापन
सामाजिक असमानता धर्म का परिणाम नहीं है। हमारे संतों ने भी यह घोषित किया था, और यहां तक कि धार्मिक ग्रंथ भी उस अवधारणा का समर्थन नहीं करते हैं। हम सभी को संतों का अनुसरण करने की आवश्यकता है। हमें अपने अहंकार से निपटने की आवश्यकता है क्योंकि यह हमें अपनी आदतों को बदलने से रोकता है। यहीं से संतों की भूमिका सामने आती है। उन्होंने कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज एक महान संत थे, जो समाज की भलाई के लिए जीते थे और लोगों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते थे।
विज्ञापन