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Hindi News ›   India News ›   RSS chief Mohan Bhagwat speech 10 important point Path Sanchalan March Nagpur

अनुच्छेद 370 से इमरान को नसीहत तक, जानिए संघ प्रमुख के संबोधन की 10 प्रमुख बातें

Tue, 08 Oct 2019 12:31 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 08 Oct 2019 12:31 PM IST
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RSS chief Mohan Bhagwat speech 10 important point Path Sanchalan March Nagpur
विजयदशमी उत्सव को संबोधित करते मोहन भागवत - फोटो : RSS Twitter

देश भर में आज विजयदशमी का पर्व मनाया जा रहा है। विजयदशमी के मौके पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ की। 

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उन्होंने सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार मजबूत सरकार है जिसने कई साहसिक फैसले लिए हैं। साथ ही अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले का उन्होंने स्वागत किया। 
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अगुवाई में निकलने वाली इस पथ संचलन में हिस्सा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और वीके सिंह पहुंचें। साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आरएसएस द्वारा आयोजित पथ संचलन में मुख्य अतिथि के तौर पर एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर भी पहुंचे।

आइए जानते हैं, संघ प्रमुख मोहन भागवत के भाषण के 10 प्रमुख बातें जो उन्होंने अपने संबोधन में कही-

1)- प्रजातंत्र बाहरी चीज नहीं: भारत में प्रजातंत्र कोई विदेशों से आयातित नई बात नहीं है, बल्कि देश के जनमानस में सदियों से चलती आई परंपरा तथा स्वातंत्र्तोत्तर काल में प्राप्त हुआ अनुभव व प्रबोधन हैं। इनके परिणामस्वरूप प्रजातंत्र में रहना व प्रजातंत्र को सफलतापूर्वक चलाना यह समाज का मन बना गया है।

2)- देशहित और जनभावना का दिया सम्मान: नई सरकार को बढ़ी हुई संख्या में फिर से चुनकर लाकर समाज ने उनके पिछले कार्यों की सम्मति व आने वाले समय के लिए बहुत सारी अपेक्षाओं को व्यक्त किया है। सरकार ने जन अपेक्षाओं को प्रत्यक्ष में साकार कर, जन भावना का सम्मान किया है। अनुच्छेद 370 को अप्रभावी बनाने के सरकार के काम से यह बात सिद्ध हुई है। 

3)- अनुच्छेद 370 पर सरकार की तारीफ: केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के फैसले को साहसी कदम बताया। अनुच्छेद 370 पर देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित शासक दल तथा इस जन भावना का संसद में समर्थन करने वाले अन्य दल भी अभिनंदन के पात्र हैं। 

4)- वैज्ञानिकों की तारीफ: संघ प्रमुख ने कहा कि वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश, उसके दक्षिण धुव्र पर अपना चंद्रयान विक्रम उतारा। यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता ना मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना यह भी सारी दुनिया को अबतक साध्य न हुई एक बात थी। उन्होंने कहा कि हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने की लगन का सम्मान हमारे वैज्ञानिकों के इस पराक्रम के कारण दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है।

5)- सेना की तैयारी: भागवत ने देश की सेना की तैयारी को लेकर कहा कि सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं। 

6)- उग्रवादी घटनाओं में कमी: भागवत ने कहा कि हमारी स्थल सीमा तथा जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है। केवल स्थल सीमा पर रक्षक व चौकियों की संख्या व जल सीमापर (द्वीपों वाले टापुओं की) निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी। देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आई है। उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है।

7)- भीड़ हिंसा से संघ के लोगों का संबंध नहीं: भीड़ हिंसा की घटनाओं पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में ऐसी कुछ घटनाएं देखने को मिलती है और हर तरफ से देखने को मिलती हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि घटना होती नहीं है लेकिन उसे बनाने की कोशिश की जाती है। संघ का नाम भीड़ हिंसा की घटनाओं से जोड़ा गया, जबकि संघ के स्वयंसेवकों का ऐसी घटनाओं से कोई संबंध नहीं होता। भीड़ हिंसा जैसा शब्द भारत का है ही नहीं क्योंकि भारत में ऐसा कुछ होता ही नहीं था।

8)- इमरान को दी नसीहत: पाकिस्तानी पीएम इमरान खान पर निशाना साधते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- कुछ लोग संघ के बारे में बिना जानकारी के कुप्रचार करते हैं। इमरान खान भी यह बात सीख गए हैं।

9)- समाज में सहयोग बढ़ाए: संघ प्रमुख ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में सद्भावना, संवाद तथा सहयोग बढ़ाने के प्रयास में प्रयासरत होना चाहिए। समाज के सभी वर्गों का सद्भाव, समरसता व सहयोग तथा कानून संविधान की मर्यादा में ही अपने मतों की अभिव्यक्ति करनी चाहिए, यह आज की स्थिति में नितांत आवश्यक बात है।

10)- न्यायालय का करें सम्मान: मोहन भागवत ने कहा कि कुछ बातों का निर्णय न्यायालय से ही होना पड़ता है। निर्णय कुछ भी हो आपस के सद्भाव को किसी भी बात से ठेस ना पहुंचे ऐसी वाणी और कृति सभी जिम्मेदार नागरिकों की होनी चाहिए। यह जिम्मेवारी किसी एक समूह की नहीं है। यह सभी की जिम्मेवारी है। सभी ने उसका पालन करना चाहिए।

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