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महाराष्ट्र: भागवत ने कहा- आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी को आमंत्रित करने के लिए काफी तैयारी करके गया था
Mon, 07 Feb 2022 02:46 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नागपुर (महाराष्ट्र)
पीटीआई, नागपुर (महाराष्ट्र)
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 07 Feb 2022 02:46 AM IST
सार
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि मुखर्जी ने उस दौरान कहा था कि अमेरिका हमें धर्मनिरपेक्षता के बारे में बता रहा है, जबकि भारत का संविधान दुनिया में सबसे धर्मनिरपेक्ष है।
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आरएसएस कार्यक्रम के दौरान भागवत और प्रणव मुखर्जी
- फोटो : PTI
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विस्तार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को लेकर कुछ बातें सामने रखीं। उन्होंने 2018 में नागपुर में हुए संघ के कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि वह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के लिए 'घर वापसी' मुद्दे पर काफी तैयारी के साथ गए थे।
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मोहन भागवत लोकमत मीडिया समूह द्वारा अपने लोकमत नागपुर संस्करण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान 'हिंदुत्व और राष्ट्रीय एकता' विषय पर बोल रहे थे।
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घर वापसी मुद्दे पर जवाब देने की कोई जरूरत नहीं पड़ी
उन्होंने कहा कि उस समय घर वापसी के मुद्दे पर संसद में अफरा-तफरी का माहौल था और वह मुलाकात के दौरान प्रणब मुखर्जी द्वारा पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार थे। आगे भागवत ने कहा कि जब वह मुखर्जी से मिलने गए थे तो उन्हें इस मुद्दे पर जवाब देने की कोई जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उन्होंने खुद कहा कि अगर आरएसएस ने घर वापसी का काम नहीं किया होता तो देश के 30 प्रतिशत समुदाय देश से कट गए होते।
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भारत की 5,000 साल पुरानी परंपरा और संस्कृति धर्मनिरपेक्ष
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि मुखर्जी ने उस दौरान कहा था कि अमेरिका हमें धर्मनिरपेक्षता के बारे में बता रहा है, जबकि भारत का संविधान दुनिया में सबसे धर्मनिरपेक्ष है। भागवत ने पूर्व राष्ट्रपति के हवाले से कहा कि संविधान बनाने वाले धर्मनिरपेक्ष थे, लेकिन वे पहले नहीं थे, क्योंकि देश की 5,000 साल पुरानी परंपरा और संस्कृति ही धर्मनिरपेक्ष थी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 2012 से जुलाई, 2017 तक राष्ट्रपति थे। उन्होंने 7 जून, 2018 को नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद काफी विवाद भी हुआ था। मुखर्जी ने इस दौरान संघ की पारंपरिक ड्रेस भी पहनी थी।