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संघ के नेताओं से मिले योगी, संघ ने दी दलितों और पिछड़ों को साथ लाने की सलाह

Tue, 26 Jun 2018 09:49 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली 
हरेन्द्र, नई दिल्ली  Updated Tue, 26 Jun 2018 09:49 PM IST
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RSS advise to cm yogi over Dalits and backward people ahead of lok sabha elections
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सलाह देते हुए कहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए यूपी में दलितों और पिछड़ों को साथ लाया जाए। वहीं संघ ने यह भी कहा है कि मुस्लिमों को ध्रुवीकरण रोकने के लिए मुस्लिमों में प्रगतिशील सोच रखने वाले नेतृत्व को उभारने पर जोर दिया जाए। 

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मंगलवार को दिल्ली के झंडेवालान में उदासीन आश्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक हुई, जिसमें हिस्सा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे। इस बैछक में शामिल होने के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत भी पहुंचे। हालांकि योगी आदित्यनाथ की भागवत से मुलाकात 10-15 मिनट के लिए हुई, लेकिन बाद में संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी और सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल से उनकी मुलाकात तकरीबन डेढ़ घंटे तक चली। हांलाकि संघ की ओर से कहा गया है कि यह एक सामान्य और शिष्टाचार मुलाकात थी।
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हालांकि इससे पहले संघ के सह सरकार्यवाह और भाजपा मामलों के समन्यवयक डॉ. कृष्णगोपाल 22 जून को लखनऊ में ही थे। उस दौरान भी वे योगी से मिले थे। जिसके बाद ही योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया में दलितों के आरक्षण का मुद्दा उछाला था।
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सूत्रों के मुताबिक बैठक में संघ ने योगी आदित्यनाथ को सलाह दी है कि आगामी चुनावों को देखते हुए दलित और पिछड़ों का भाजपा के साथ आना बेहद जरूरी है। बैठक में आगामी चुनावों में सपा-बसपा गठबंधन से मिलने वाले चुनौतियों पर चर्चा के दौरान संघ ने कहा कि अन्य पिछड़े वर्गों और दलितों में उपवर्गीकृत जातियों को आरक्षण के दायरे में लाने की कोशिशें की जा रही है, ताकि सभी तबकों तक आरक्षण का फायदा मिले। 

केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण नीति में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है

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गौरतलब है कि भाजपा पहले ही बेहद पिछड़ा जातियों (ईबीसी) और अति पिछड़ा जातियों (एमबीसी) तक अपनी पहुंच बनाने और उन्हें एकजुट करने की तैयारी कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की हाल ही में 27 मई को यूपी के बागपत में एक रैली में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण नीति में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत ओबीसी यानी अन्य पिछड़े वर्गों के कोटे के अंदर बेहद या अति पिछड़ी जातियों के लिए अलग से आरक्षण देने का प्रस्ताव है। 

सूत्रों ने बताया कि संघ नेताओं के साथ मुलाकात में मुस्लिमों के ध्रुवीकरण रोकने पर भी चर्चा हुई। योगी इस बात से चिंतित हैं कि अगर सपा-बसपा गंठबंधन बनता है कि मुस्लिम एकजुट हो सकते हैं।

संघ ने योगी से कहा है कि मुस्लिमों में प्रगतिशील विचारधारा वाले नेतृत्व को उभारा जाए, ताकि वे भाजपा के साथ जुड़ सकें। संघ ने कहा कि मोदी सरकार की जनहित योजनाओं के लाभार्थी मुस्लिम भी हैं, अतः प्रगतिशील सोच रखने वाले नेताओं को इस काम में लगाया जाए, जो सरकार की उपलब्धियों को उस तबके तक पहुंचा सके। 

सरकार पिछड़ों और दलितों के लिए फिक्रमंद

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सूत्रों ने बताया कि संघ भी हर तबके को साथ लेकर चलने के लिए तत्पर है और इसके लिए वह समरसता अभियान भी चला रहा है। संघ ने योगी से कहा है कि वह भी उत्तर प्रदेश में इस अभियान को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि सरकार पिछड़ों और दलितों के लिए फिक्रमंद है। 

वहीं संघ ने योगी के उन प्रयासों की प्रशंसा की, जिसमें यूपी सरकार ने किसानों से गेहूं खरीद के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। संघ ने योगी से कहा है कि वे इसका ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें, ताकि किसानों तक सकारात्मक संदेश जाए। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इस बार 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है, जो पिछली सरकारों से सबसे ज्यादा है। 

वहीं बैठक में राम मंदिर को लेकर भी चर्चा हुई। संघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर पर 6 जुलाई से सुनवाई शुरू होने वाली है और 2019 के चुनावों से पहले ही फैसला आने की उम्मीद है। संघ ने कहा कि अगर रोजाना सुनवाई चलती है, तो अक्टूबर तक फैसला आ सकता है।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ सोमवार को ही अयोध्या से लौटे हैं। राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर तेजी से उभर कर सामने आ रहा है। पहले संतों की नाराजगी दूर करने के लिए विहिप के प्रमुख अशोक सिंहल हुआ करते थे लेकिन उनकी अनुपस्थिति में संतों के साथ समन्वय स्थापित नहीं पा रहा है। 

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