फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   rs 20 bribery case: man found innocent after 30 years in jail dies next day

ये कैसा इंसाफ?: 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में 30 साल लड़ना पड़ा मुकदमा, अदालत से बरी होने के बाद निकल गई जान

Sat, 07 Feb 2026 09:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 07 Feb 2026 09:18 PM IST
सार

सिर्फ 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में गुजरात के पुलिस कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति ने करीब 30 साल कानूनी लड़ाई और जेल में सजा काटी। हाईकोर्ट ने चार फरवरी को गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया और उन्हें बेगुनाह करार दिया। फैसले के अगले ही दिन बाबू भाई का निधन हो गया। 

विज्ञापन
rs 20 bribery case: man found innocent after 30 years in jail dies next day
तीस साल बाद बेगुनाह साबित हुआ पुलिस कांस्टेबल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

यह कहानी असल जिंदगी की एक फिल्म जैसी है। अंतर बस इतना है कि इसका अंत और बेहतर हो सकता था। अगर यह व्यक्ति कुछ दिन और जीवित रहता। गुजरात में एक व्यक्ति ने केवल 20 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में 30 साल जेल में बिताए। अब जाकर उसे बेगुनाह घोषित किया गया है। यह मामला 1994 की उस हॉलीवुड फिल्म से मिलता-जुलता लग रहा है, जिसमें एक निर्दोष व्यक्ति लंबे समय तक जेल में रहता है।
विज्ञापन


गुजरात हाईकोर्ट ने चार फरवरी को अपने फैसले में व्यक्ति निर्दोष करार दिया। फैसले के बाद उसने कहा था, मेरे जीवन से कलंक हट गया है। अब अगर भगवान भी मुझे अपने पास बुला लें, तो मुझे कोई दुख नहीं होगा।
विज्ञापन


1996 में क्या हुआ था?
  • पुलिस कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति अहमदाबाद में तैनात थे। 
  • उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने 20 रुपये की रिश्वत ली थी।
  • यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया।
  • 1997 में सत्र न्यायालय में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ।
  • 2002 में आरोप तय किए गए। 2003 में गवाहों की सुनवाई शुरू हुई।
  • 2004 में सत्र न्यायालय ने बाबूभाई प्रजापति को दोषी ठहराया।
  • उन्हें चार साल की जेल और 3,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
इसके बाद प्रजापति ने गुजरात हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। लेकिन उनकी अपील 22 साल तक लंबित रही।
आखिरकार चार फरवरी को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और उन्हें बेगुनाह घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: ठाणे में 13 करोड़ रुपये से अधिक की हेरोइन जब्त; अंडरवर्ल्ड से जुड़े शख्स समेत तीन गिरफ्तार


फैसले के अगले ही दिन गई जान
प्रजापति के वकील नितिन गांधी ने अदालत को बताया कि पूरा मामला केवल शक के आधार पर था। फैसले के बाद बाबूभाई प्रजापति ने अपने वकील के कार्यालय में भावुक होकर बातें बताईं। इसके बाद वह अपने घर लौट गए। अगले ही दिन उनकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई। उनके शुभचिंतकों ने कहा कि काश वे कुछ दिन और जीवित रहते। वकील ने बताया, कल जब वह मेरे कार्यालय आए थे, तो बहुत खुश थे। उन्हें बरी किया गया था।

वकील ने कहा, मैंने उनसे कहा कि आप सरकार से मिलने वाले सभी लाभों के लिए आवेदन करें। अगले दिन मैंने उन्हें फोन किया, तो पता चला कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed