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ई-कॉमर्स पर गोलमेज सम्मेलन में प्रेस नोट 3 को लागू करने और रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग

Wed, 08 Aug 2018 08:45 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Aug 2018 08:45 PM IST
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Round Table Conference on E-Commerce: Demands to implement Press Note 3, set up regulatory authority
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ई-कॉमर्स व्यापार नीति को लेकर बुधवार को देश के विभिन्न प्रमुख संगठनों ने कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के बैनर तले दिल्ली में एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। इसमें ई-कॉमर्स के लिए एक सुदृढ़ नीति बनाने, व्यापार के समान अवसर दिए जाने, डाटा की सुरक्षा और छोटे व्यापारियों को ई-कॉमर्स से जोड़ने की मांग की है। एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पास कर सरकार से मांग की गई है कि वर्ष 2016 के प्रेस नोट 3 को सख्ती से लागू किया जाए। अगर कोई कंपनी उसका उल्लंघन करती है तो उसे तत्काल दंडित किया जाए। ई-कॉमर्स की देख रेख और उसे नियंत्रित करने के लिए एक रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए। 
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डीडीयू मार्ग पर हिंदी भवन में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 तक देश में डिजिटल इकॉनमी एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगी। वर्ष 2030 तक यह कुल अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा यानी 50 प्रतिशत होगी। ऐसे में ई-कॉमर्स के लिए एक ठोस, समग्र एवं मजबूत नीति का होना बेहद जरूरी है, जिसमें घरेलू व्यापार के हित सुरक्षित हों। इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी का समावेश हो तथा डाटा सुरक्षा का मजबूत तंत्र स्थापित हो। 
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व्यापारी नेता ने कहा, ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सीमित इन्वेंटरी की अनुमति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। वजह, ई-कॉमर्स कंपनियां केवल टेक्नोलॉजी प्रदाता हैं और उनका इन्वेंटरी से कोई लेना-देना नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो ई-कॉमर्स का बुनियादी ढांचा ही हिल जायेगा।
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बल्क परचेस, बहुत ही भ्रामक शब्द है जिसको सही तरीके से परिभाषित करना जरूरी है। ई-कॉमर्स कंपनियां किसी भी तरह का कोई डिस्काउंट नहीं दे सकती। यह प्रावधान भी नीति में किया जाना आवश्यक है, क्योंकि ई-कॉमर्स पर बिकने वाले सामान की मिलकियत उनकी नहीं है। प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को अथॉरिटीज के साथ पंजीकृत होना जरूरी जरूरी है। 

अधिकृत आंकड़े न होने के कारण मनमानी का बोलबाला

Round Table Conference on E-Commerce: Demands to implement Press Note 3, set up regulatory authority
व्यापारी नेताओं ने कहा, अभी तक ई-कॉमर्स की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। वहीँ दूसरी ओर ई कॉमर्स बाजार के कोई अधिकृत आकंड़े न होने से इस व्यापार में विसंगतियों और मनमानी का बोलबाला है। अभी तक डाटा को लेकर हमारे देश में बेहद उदासीनता है। दूसरी तरफ डिजिटल वित्तीय ढांचे को भी नए सिरे से बनाने की जरूरत है।

इसी प्रकार छोटे व्यापरियों को ई-कॉमर्स पर व्यापार के बड़े और निष्पक्ष अवसर मिलें, यह भी जरूरी है। सम्मेलन में हुई चर्चा पर कैट की सिफारिशों को लेकर एक श्वेत पत्र तैयार किया जाएगा। बाद में इसे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को सौंप कर उनसे आगे की कार्यवाही करने का आग्रह करेंगे।

गोलमेज सम्मेलन में व्यापार, उद्योग, ट्रांसपोर्ट, किसान, लघु उद्योग व उपभोक्ता संगठनों के अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों, आर्थिक विश्लेषकों और चिंतकों ने भाग लिया। 
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