अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को राजघाट पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं, अब सिर्फ राजनीतिक प्लेटफार्म का सहारा
सेंट्रल पुलिस कैंटीन का लोकल किया जाना एक सराहनीय कदम था, लेकिन यहां मिलने वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट नहीं दी गई। जीएसटी के चलते इन कैंटीनों में मिलने वाला सामान मार्केट रेट पर आ गया है...
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को 13 दिसंबर के दिन राजघाट पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं मिली। दिल्ली पुलिस ने इस बारे में लॉकडाउन, कोरोना संक्रमण और कानून व्यवस्था का हवाला दिया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक, केंद्र सरकार अर्धसैनिक बलों के हितों के लिए उठाई जा रही मांगों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
मांगें पूरी कराने के लिए अब एसोसिएशन की ओर से पूर्व सैनिकों के विभिन्न संगठनों की तर्ज पर राजनीतिक प्लेटफार्म का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए 13 दिसंबर को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय एक्स-पैरामिलिट्री चौकीदार सेमिनार आयोजित करने की योजना बनी है।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि इस सेमिनार में राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों में अर्धसैनिक बलों के पूर्व सदस्य तय करेंगे कि वोट किसे दिए जाए। इनकी तादाद करीब 40 लाख है। उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस द्वारा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मियों को राजघाट पर जमा न होने देना गलत है। सरकार, शांतिपूर्वक तरीके से हमारी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।
प्रधानमंत्री ने बीएसएफ बांकुरों के साथ सरहद पर दिवाली मनाकर उनका उत्साह बढ़ाया, लेकिन उनके कल्याण के लिए कोई घोषणा नहीं की। इससे अर्धसैनिक बलों के लाखों परिवारों में भारी बैचेनी और नाराजगी है। इन बलों में आए दिन जवानों द्वारा आत्महत्या करने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जवानों की पेंशन भी खत्म हो चुकी है। इन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
मौजूदा अर्धसैनिकों के अलावा बलों के पूर्व कर्मियों को न तो बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं और न ही राज्यों में पैरा मिलिट्री चौकीदारों के वास्ते कल्याण बोर्ड का गठन हो सका है। इन बलों के रिटायर्ड जवानों को एक्स मैन का दर्जा भी सरकार ने जरूरी नहीं समझा।
सेंट्रल पुलिस कैंटीन का लोकल किया जाना एक सराहनीय कदम था, लेकिन यहां मिलने वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट नहीं दी गई। जीएसटी के चलते इन कैंटीनों में मिलने वाला सामान मार्केट रेट पर आ गया है। किसी भी बल का डीजी कैंटीन पर जीएसटी छूट देने की बात केंद्रीय गृहमंत्री तक नहीं पहुंचाता।
हाल में आईटीबीपी के डीजी ने एक फरमान जारी कर शराब पर रोक लगा दी है। यानी आईटीबीपी कैंटीन पर इनके जवानों को छोड़कर अन्य बलों के रिटायर्ड अर्धसैनिक शराब नहीं ले सकते। रणबीर सिंह के मुताबिक एसोसिएशन अब राजनीतिक विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है, जो भी राजनीतिक दल पूर्व अर्धसैनिकों की मांगों को पूरा करने का ठोस और समयबद्ध वादा करेगा, उसे आगामी चुनाव में समर्थन दिया जाएगा।