राहुल की वापसी की पटकथा है फेरबदल, मरहम लगाकर कतरे गए पर

विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Sat, 12 Sep 2020 06:42 AM IST
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कांग्रेस - फोटो : फाइल

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सार

  • दिग्विजय, सुरजेवाला और जितिन प्रसाद को अहमियत, मुकुल वासनिक का महत्व बरकरार
  • गुलाम नबी और आनंद शर्मा को विशेष समिति में जगह नहीं

विस्तार

कांग्रेस के भीतर जारी सागर मंथन के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। एक बड़े सांगठनिक फेरबदल से इसका संकेत मिल गया कि पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी के 23 बड़े नेताओं ने बदलाव के लिए जो पत्र लिखा था उसके बाद से सबकुछ ठीक नहीं है। बता दें कि पत्र विवाद के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में एक मत से कांग्रेस अध्यक्ष को संगठन और कार्यसमिति के पुनर्गठन का अधिकार दिया गया था।
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उसका संज्ञान लेते हुए सोनिया गांधी ने एक तरफ यह संदेश देने की कोशिश की है कि पत्र बम फोड़ने वाले जी-23 के नेताओं के प्रति नेतृत्व में कोई दुर्भावना नहीं है। वहीं दूसरी ओर बेहद चतुराई से पत्र मुहिम के अगुआ नेताओं के पर तो कतरे गए लेकिन साथ ही कुछ मरहम भी लगाया गया है। साथ ही इस फेरबदल से साफ है कि राहुल गांधी के करीबियों पर नेतृत्व ने फिर भरोसा किया है और एक तरह से अगले कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी के दोबारा अध्यक्ष बनने की पटकथा लिखनी शुरू हो गई है।
एक तरफ जहां महासचिव पद से जी-23 के कप्तान गुलाम नबी आजाद की छुट्टी कर दी गई, लेकिन उन्हें और जी-23 के दूसरे अगुआ नेता आनंद शर्मा को कांग्रेस कार्यसमिति में बनाए रखा गया है। साथ ही कार्यसमिति में इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली अंबिका सोनी, परिवार और पार्टी के बेहद वफादार बुजुर्ग मोतीलाल वोरा और पिछली लोकसभा में सदन में कांग्रेस संसदीय दल के नेता रहे मल्लिकार्जुन खड़गे और लुईजिनियो फ्लेरियो को भी महासचिव पद से मुक्त कर दिया गया। 
साथ ही पिछले लंबे समय से कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी और राहुल गांधी के भरोसेमंद रणदीप सिंह सुरजेवाला को महासचिव बनाकर और कार्यसमिति में लाकर उनकी निष्ठा और मेहनत को नेतृत्व ने मान्यता दी है। लेकिन अंबिका सोनी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कार्यसमिति में बनाए रखा गया है। जबकि मोतीलाल वोरा और लुईजिनियो फ्लेरियो को कार्यसमिति में जगह नहीं मिली।

साथ ही वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को स्थाई आमंत्रित सदस्य के रूप में पार्टी की शीर्ष संस्था कार्यसमिति में शामिल किया गया है। इससे यह संदेश दिया गया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद दिग्विजय का कद पार्टी में लगातार बढ़ रहा है।

दिग्विजय को महत्व देने के पीछे मध्य प्रदेश में होने वाले 27 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की रणनीति भी है। पिछले दिनों जब कांग्रेस में पत्र बम फूटा था तो बड़े नेताओं में दिग्विजय सिंह ने खुलकर राहुल गांधी को दोबारा अध्यक्ष बनाने की मांग करते हुए कहा था कि जो इसके विरोध में हैं वो सामने आएं।

लेकिन सबसे अहम है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सांगठनिक और सामान्य कामकाज में सहायता करने के लिए बनी विशेष समिति में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, वीरप्पा मोईली जैसे नेताओं को नहीं रखा गया है। इसमें भी राहुल गांधी के दबदबे की छाप साफ दिखाई पड़ती है।

समिति में ए के एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, के.सी. वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला को रखा गया है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले मुकुल वासनिक को जरूर जगह दी गई है, लेकिन उन्हें सोनिया गांधी और अहमद पटेल का बेहद वफादार माना जाता है। यह समिति अगले एआईसीसी सत्र तक काम करेगी।

मुकुल वासनिक का महत्व बना हुआ है इसका एक प्रमाण है कि उनके नाम को महासचिवों में अभी भी नंबर एक पर रखा गया है। इनके बाद हरीश रावत, ओमन चांडी, तारिक अनवर, प्रियंका गांधी वाड्रा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जितेंद्र सिंह, अजय माकन और के.सी. वेणुगोपाल के नाम हैं।

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को गोलबंद करने में जुटे जितिन प्रसाद को चुनाव वाले राज्य पश्चिम बंगाल के साथ साथ अंडमान निकोबार का प्रभारी बनाकर नई जिम्मेदारी देकर उनके कद में इजाफा किया गया है। जबकि पत्र पर दस्तखत करने वालों में जितिन प्रसाद भी शामिल थे। 

पुराने प्रभारियों पी.एल. पूनिया, शक्तिसिंह गोहिल, आरपीएन सिंह की जिम्मेदारी पहले की तरह बरकरार रखी गई है। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल को प्रशासन, रजनी पाटिल को जम्मू कश्मीर, राजीव शंकरराव सातव को गुजरात, दादर नगर हवेली, राजीव शुक्ला को हिमाचल प्रदेश, माणिक टैगोर को तेलंगाना, डॉ. चेल्लाकुमार को ओडिशा, एच.के. पाटिल को महाराष्ट्र, देवेंद्र यादव को उत्तराखंड, विवेक बंसल को हरियाणा, मनीष चतरथ को अरुणाचल प्रदेश एवं मेघालय, भक्तचरण दास को मिजोरम एवं मणिपुर और कुलजीत सिंह नागरा को सिक्किम, नगालैंड और त्रिपुरा का प्रभार दिया गया है। 

कांग्रेस कार्यसमिति के स्थाई सदस्यों में लगभग पुराने सभी नेताओं के साथ तारिक अनवर और रणदीप सिंह सुरजेवाला को शामिल किया गया है। विशेष आमंत्रित सदस्यों में दीपेंद्र हुड्डा, कुलदीप सिंह बिश्नोई को शामिल करके हरियाणा की राजनीति को संतुलित किया गया है। इनमें एक नाम सचिन राव का है, जो राहुल गांधी के सहायक हुआ करते थे। इनके अलावा सुष्मिता देव, चिंता मोहन, लालजी देसाई, जी. संजीवा रेड्डी, नीरज कुंदन और बीवी श्रीनिवास भी विशेष आमंत्रित सदस्यों में हैं।
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