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Research: तो ऐसे नरवानर से विकसित होकर मानव बने, दुनियाभर के विज्ञानियों ने मिलकर खोजा दिमागी संरचना में अंतर
Sat, 14 Oct 2023 07:46 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 14 Oct 2023 07:46 AM IST
सार
शोधकर्ताओं के मुताबिक मानव और नरवानरों के मस्तिष्क के कोशिकीय (सेलुलर) व आनुवंशिकीय (जेनेटिक) स्तर पर की गई मैपिंग इसकी सक्रियता और निष्क्रियता की गहरी समझ देती है। यह ज्ञान मानसिक विकारों और मस्तिष्क की अन्य बीमारियों के लिए नई पीढ़ी के सटीक उपचार खोजने में मददगार साबित होगा।
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Evolution
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नरवानर यानी प्राइमेट और इंसानों को दिमागी तौर पर क्या अलग बनाता है, इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक समुदाय ने खोज लिया है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि मूल रूप से मस्तिष्क के कई क्षेत्रों में तंत्रिका तंत्र में हुई छोटे-छोटे कोशिकीय बदलावों की वजह से हम नरवानरों से विकसित होकर मानव बने हैं।
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इस व्यापक शोध पर जर्नल साइंस, साइंस एडवांसेज और साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन जैसी शोध पत्रिकाओं में 20 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक मानव और नरवानरों के मस्तिष्क के कोशिकीय (सेलुलर) व आनुवंशिकीय (जेनेटिक) स्तर पर की गई मैपिंग इसकी सक्रियता और निष्क्रियता की गहरी समझ देती है। यह ज्ञान मानसिक विकारों और मस्तिष्क की अन्य बीमारियों के लिए नई पीढ़ी के सटीक उपचार खोजने में मददगार साबित होगा।
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कुछ जीन की वजह से अलग-अलग मस्तिष्क
स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और अमेरिका के एलन इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन साइंस के वैज्ञानिकों ने व्यक्तिगत मस्तिष्क कोशिकाओं में जीन के स्तर पर हुए बदलावों का अध्ययन किया।
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अध्ययन में पता चला कि हम नरवानर रिश्तेदारों के साथ एक ही मूल मस्तिष्क कोशिकीय वास्तुकला साझा करते हैं, सिर्फ न्यूरॉन्स के बीच संबंधों और सर्किट निर्माण में कुछ अलग जीन शामिल होते हैं, जिनकी वजह से मनुष्य और प्राइमेट्स के मस्तिष्क अलग-अलग होते हैं।