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Hindi News ›   India News ›   Republic Day 2020: Prime Minister Narendra Modi Mann Ki Baat

'मन की बात' में बोले पीएम मोदी, हिंसा समस्या का समाधान नहीं, शांति हर सवाल का जवाब

Mon, 27 Jan 2020 05:40 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Mon, 27 Jan 2020 05:40 AM IST
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Republic Day 2020: Prime Minister Narendra Modi Mann Ki Baat
मन की बात में बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गणतंत्र दिवस पर शाम छह बजे 'मन की बात' की। गणतंत्र दिवस समारोह की वजह से इस रविवार प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम के समय में यह बदलाव किया गया। सुबह 11 बजे की बजाय शाम छह बजे का वक्त तय किया गया था। यह प्रधानमंत्री मोदी का नए साल में पहला 'मन की बात' कार्यक्रम था।

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पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है और शांति हर सवाल के जवाब का आधार होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एकजुटता से हर समस्या के समाधान का प्रयास हो और भाईचारे के जरिए हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करें। आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोकतंत्र का युग है। क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो ?

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प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात':-

  • देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना, हर दिन, पहले से अधिक मजबूत होती जाती है।
  • दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन, भारत के लोगों का उत्साह और हम भी कुछ कम नहीं हैं, हम भी कुछ करके रहेंगे | ‘कर सकते हैं’...ये ‘कर सकते हैं’ का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है।
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  • इस बार ‘गणतंत्र दिवस’ समारोह की वजह से आपसे ‘मन की बात’, उसके समय में परिवर्तन करना, उचित लगा। और इसीलिए, एक अलग समय तय करके आज आपसे ‘मन की बात’ कर रहा हूं।
  • हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोकतंत्र का युग है। क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो? हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती।
  • वर्ष 2022 में हमारी आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं और उस मौके पर हमें गगनयान मिशन के साथ एक भारतवासी को अंतरिक्ष में ले जाने के अपने संकल्प को सिद्ध करना है।
  • स्वच्छता के बाद जन भागीदारी की भावना एक और क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है और वह है जल संरक्षण। इसके लिए कई व्यापक और नवोन्मेषी प्रयास देश भर में चल रहे हैं। समाज के हर क्षेत्र के लोग इसमें भागीदारी कर रहे हैं।
  • जब हर भारतवासी एक कदम चलता है तो हमारा भारतवर्ष 130 करोड़ कदम आगे बढ़ता है।
  • दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन भारत के लोगों का उत्साह कायम है कि , हम कुछ करके रहेंगे। हम कुछ कर के रहेंगे का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है।
  • देशवासियों को यह जानकर बहुत प्रसन्ता होगी कि पूर्वोत्तर में अलगाववाद बहुत कम हुआ है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस क्षेत्र से जुड़े हर एक मुद्दे को शांति के साथ, ईमानदारी से चर्चा करके सुलझाया जा रहा है।
  • विश्व, भारत से जो अपेक्षा करता है, उन अपेक्षाओं को पूर्ण करने का सामर्थ्य, भारत प्राप्त करके रहेगा , इस विश्वास के साथ आइये- नए दशक की शुरुआत करते हैं और नए संकल्पों के साथ मां भारती के लिए जुट जाते हैं।
  • मोदी ने कहा कि हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती। दुनिया की किसी भी समस्या का हल, कोई दूसरी समस्या पैदा करने से नहीं बल्कि अधिक-से-अधिक उसका समाधान ढूंढकर ही हो सकता है।
  • आइये, हम सब मिल कर,एक ऐसे नए भारत के निर्माण में जुट जाएं, जहां शांति हर सवाल के जवाब का आधार हो। एकजुटता से हर समस्या के समाधान के प्रयास हो और, भाईचारा, हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करे।
  • पिछले वर्ष, त्रिपुरा में भी 80 से अधिक लोग, हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्य-धारा में लौट आए हैं जिन्होंने यह सोचकर हथियार उठा लिए थे कि हिंसा से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है, उनका यह विश्वास दृढ़ हुआ है कि शांति और एकजुटता ही, किसी भी विवाद को सुलझाने का एक-मात्र रास्ता है।
  • देश के किसी भी कोने में अब भी हिंसा और हथियार के बल पर समस्याओं का समाधान खोज रहे लोगों से आज, इस गणतंत्र-दिवस के पवित्र अवसर पर अपील करता हूं कि वे वापस लौट आएं। मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में, अपनी और इस देश की क्षमताओं पर भरोसा रखें। 
  • ब्रू-रियांग शरणार्थियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए | इसके साथ ही, लगभग 25 वर्ष पुरानी ब्रू-रियांग शरणार्थी समस्या के एक दर्दनाक अध्याय का अंत हुआ। यह समस्या 90 के दशक की है | 1997 में जातीय तनाव के कारण ब्रू रियांग जनजाति के लोगों को मिजोरम से निकल करके त्रिपुरा में शरण लेनी पड़ी थी | इन शरणार्थियों को उत्तर त्रिपुरा के कंचनपुर स्थित अस्थाई कैम्पों में रखा गया था। यह बहुत पीड़ादायक है कि ब्रू रियांग समुदाय के लोगों ने शरणार्थी के रूप में अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया था। 23 साल तक - न घर, न जमीन, न परिवार के लिए , बीमारी के लिए इलाज का प्रबंध और ना बच्चों के शिक्षा की सुविधा।
  •  सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इनकी पीड़ा का हल नहीं निकल पाया। लेकिन इतने कष्ट के बावजूद भारतीय संविधान और संस्कृति के प्रति उनका विश्वास अडिग बना रहा।
  • इसी विश्वास का नतीजा है कि उनके जीवन में आज एक नया सवेरा आया है। समझौते के तहत, करीब 34000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा। इतना ही नहीं, उनके पुनर्वास और सर्वांगीण-विकास के लिए केंद्र सरकार लगभग 600 करोड़ रुपये की मदद भी करेगी। प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने में उनकी मदद की जाएगी। इसके साथ ही, उनके राशन का प्रबंध भी किया जाएगा। ये समझौता कई वजहों से बहुत खास है। ये सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है।
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