पीरियड बंक मारने का मतलब है बड़ी मुसीबत: रिपोर्ट
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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की रिपोर्ट में सामने आया है कि स्कूली बच्चों द्वारा शारीरिक शिक्षा के पीरियड में बंक मारना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उनकी यह लापरवाही शुगर जैसी बीमारी को न्यौता दे रही है। खास बात है कि इस स्थिति को लेकर न तो स्कूल संचालक गंभीर हैं और न ही अभिभावक। केंद्र सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय अब आईसीएमआर की इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। इस बाबत सभी राज्यों के शिक्षा विभागों को कड़ी हिदायतें जारी की जाएंगी। समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्राइवेट एवं सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगी। बच्चों की डाइट को लेकर वर्कशॉप भी आयोजित होंगी।
बुधवार को एम्स में आयोजित आईसीएमआर के एक कार्यक्रम में ‘शुगर एवं इसके विभिन्न रूप’, विषय पर अपनी स्टडी रिपोर्ट पेश करते हुए मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वी मोहन ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा, देश में 1990 के दौरान शु्गर के मरीजों की संख्या दो करोड़ साठ लाख थी, जबकि 2016 में यह आकड़ा बढ़कर साढ़े छह करोड़ के पार पहुंच गया है। शुगर के मामले में डिस्ऐबेलिटी एडजस्टिड लाइफ ईयर (डीएएलवाई) भी सबसे तेज यानी 1990 से लेकर अब तक 39 फीसदी बढ़ चुकी है।
बीस साल या उससे अधिक आयु वाले पुरुषों में शुगर के मामले 7.7 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि 25 साल पहले यह प्रतिशत 5.5 था। शुगर के एपेडमायोलॉजिक्ल ट्राजिशन लेवल (ईटीएल) को देखें तो तमिलनाडू और केरल सबसे उपर हैं। इसके बाद दिल्ली, पंजाब, गोवा और कर्नाटक का नंबर आता है। भारत में प्रत्येक सौ ओवरवेट लोगों पर शुगर के औसतन 38 मरीज सामने आते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत 19 है। डॉ. मोहन का कहना है कि स्कूली बच्चों में तेजी से शुगर के केस बढ़ रहे हैं। यह केवल स्कूल संचालकों और अभिभावकों की लापरवाही का नतीजा है। स्कूल में जब शारीरिक गतिविधि का पीरियड होता है तो बच्चे किसी दूसरे स्पेशल पीरियड में चले जाते हैं।
रिपोर्ट यह भी मिली है कि अधिकांश बच्चे शारीरिक शिक्षा के पीरियड में कंप्यूटर या मैथ का काम करने लगते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी मिले हैं जो क्लास में बैठकर खेलना पसंद करते हैं। घर में भी अभिभावक उन्हें खेलने के लिए प्रेरित नहीं करते। नतीजा, शरीर में कार्बो जैसे कई तत्वों की मात्रा बढ़ने से बच्चों में मोटापा आने लगता है, जिससे आगे चलकर वे शुगर के मरीज बन जाते हैं। आईसीएमआर के डीजी प्रोफेसर बलराम भार्गव का कहना है कि रोजाना तीस मिनट तक पैदल चला जाए और कार्बोहाइ्रडेट पर थोड़ा नियंत्रण किया जाए तो शुगर से बचा जा सकता है।
मोटापा तो दौड़-दौड़ कर लोगों को पकड़ रहा है
रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 में मोटापा बढ़ने की दर 9.0 थी तो 2016 में वह बढ़कर 20.4 हो गई है। मोटापा बढ़ने के कारणों में डाइट ठीक न होना, तंबाकू का इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधि का कम होना बताया गया है।
पंजाब, केरल, तमिलनाडू, उत्तराखंड, सिक्किम व गोवा— 29.0
तेलंगाना, आध्रंप्रदेश, हरियाणा, जेएंडके— 24.0 से 28.9
महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, यूपी व असम— 19.0 से 23.9
गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिसा, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा व मिजोरम— 14.0 से 18.9
कर्नाटक, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड व नागालैंड— 9.0 से 13.9
विभिन्न राज्यों में प्रत्येक सौ लोगों पर शुगर का प्रचलन
तमिलनाडू व केरल— 10.5
पंजाब, गोवा व कर्नाटक— 9.0 से 10.0
तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, त्रिपुरा व उत्तराखंड— 7.5 से 8.9
गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिसा, छत्तीसगढ़, उतरप्रदेश, झारखंड, हरियाणा, असम, सिक्किम, जेएंडके व मणिपुर— 6.0 से 7.4
राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड व मिजोरम— 4.5 से 5.9