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बाल गृहों पर रिपोर्ट बेहद डरावनी, पर हम असहाय हैं : सुप्रीम कोर्ट

Wed, 29 Aug 2018 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 29 Aug 2018 12:37 AM IST
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Report on shelter home is very terrible but we are helpless- supreme court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
शेल्टर होम में रह रहे बच्चों की स्थिति पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थिति भयावह है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लेकिन इस मामले में हम असहाय हैं, क्योंकि यदि अथॉरिटी को कोई निर्देश देते हैं, तो उसे ‘न्यायिक सक्रियता’ करार दे दिया जाता है।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एनसीपीसीआर की सोशल ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2874 चिल्ड्रन होम में से महज 54 की स्थिति ठीक है। जिन 185 शेल्टर होम का ऑडिट किया गया है, उनमें से केवल 19 के पास बच्चों का रिकॉर्ड है।
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पीठ ने कहा, ‘भले ही अथॉरिटी अपना काम न करे और जवाबदेही एक-दूसरे पर टालती रहे, लेकिन यदि अदालत उस में दखल देती है तो उसे न्यायिक सक्रियता करार दे दिया जाता है। हम क्या करें। हम लाचार हैं।’ अमाइकस क्यूरी अपर्णा भट्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत का निर्देश न्यायिक सक्रियता नहीं है, क्योंकि शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों का हित महत्वपूर्ण है। 
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पीठ ने कहा कि यदि अथॉरिटी ने सही तरीके से अपना काम किया होता, तो मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में लड़कियों के साथ बलात्कार नहीं होता। पीठ ने कहा कि एनसीपीसीआर की रिपोर्ट से साफ है कि किसी को परवाह नहीं है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस सुझाव को ठुकरा दिया कि शेल्टर होम की निगरानी के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कमेटी होनी चाहिए।केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि मौजूदा तंत्र पर्याप्त है। ऐसे में किसी और कमेटी की जरूरत नहीं है। 
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