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Law Minister: अदालतों में क्षेत्रीय व स्थानीय भाषाओं को दें बढ़ावा, रिजिजू बोले- मानसून सत्र में 71 कानून निरस्त होंगे
Sat, 16 Jul 2022 10:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, जयपुर
पीटीआई, जयपुर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 16 Jul 2022 10:11 PM IST
सार
रिजिजू ने कहा कि वह इस विचार से सहमत नहीं हैं कि अंग्रेजी बोलने वाले वकील को अधिक सम्मान, ज्यादा केस या ज्यादा फीस मिलना चाहिए।
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केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू
- फोटो : social media
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विस्तार
केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने शनिवार को जयपुर में कहा कि निचली अदालतों और हाईकोर्टों में क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा को अंग्रेजी से कम नहीं मानना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के मानसून सत्र में 71 कानून निरस्त किए जाएंगे।
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रिजिजू ने जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बहस और निर्णय अंग्रेजी में होते हैं, लेकिन हमारा मानना है कि उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना चाहिए। वह इस विचार से सहमत नहीं हैं कि अंग्रेजी बोलने वाले वकील को अधिक सम्मान', ज्यादा केस या ज्यादा फीस मिलना चाहिए। कोई भी अदालत केवल विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए नहीं होनी चाहिए। न्याय के दरवाजे सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।
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अदालतों में पांच करोड़ केस लंबित
उन्होंने कहा कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान करीब 71 कानूनों को निरस्त किया जाएगा। देश में लंबित मामले बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामले पांच करोड़ होने जा रहे हैं, लेकिन न्यायपालिका और सरकार के बीच समन्वय से लंबित मामलों को कम किया जा सकता है। कानून मंत्री ने कहा कि लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच अच्छा तालमेल होना चाहिए।
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एएसआई को और मजबूती देने वाला विधेयक तैयार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को और मजबूती प्रदान करने और प्राचीन स्मारकों से संबंधित कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष (संशोधन) विधेयक, 2022 को सरकार ने पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। विधेयक का उद्देश्य निषिद्ध क्षेत्र और अन्य संशोधनों को युक्तिसंगत बनाना है।
बिल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह उस प्रावधान को प्रतिस्थापित करेगा जो एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तय की जाने वाली साइट-विशिष्ट सीमाओं के साथ केंद्र-संरक्षित स्मारकों के आसपास निर्माण गतिविधि के लिए 100 मीटर निषिद्ध क्षेत्र की अनुमति देता है।
प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम, 1958 को 2010 में संशोधित किया गया था ताकि संरक्षित स्मारकों के 100 मीटर के दायरे को निषिद्ध क्षेत्रों और अगले 300 मीटर के दायरे को विनियमित क्षेत्रों के रूप में घोषित किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन निषिद्ध और विनियमित क्षेत्रों को युक्तिसंगत बनाने के लिए अधिनियम की धारा 20 ए को बदल देगा, जो निषिद्ध क्षेत्र को संदर्भित करता है। विशेषज्ञ स्मारक समितियां किसी विशेष स्मारक के आसपास के निषिद्ध क्षेत्र का फैसला करेंगी।
छावनियों की दक्षता बढ़ाने के लिए मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारी
केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में छावनी विधेयक लाने की तैयारी में है। इसका मकसद देशभर में फैली छावनियों की दक्षता बढ़ाना है। एक अधिकारिक पत्र में कहा गया है कि विधेयक का उद्देश्य छावनियों में जिंदगी को आसान बनाना है। मौजूदा समय में देशभर में 62 छावनियां हैं और अधिकांश में सेना और नागरिक दोनों हैं। छावनियों का प्रशासन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। छावनी बिल 2022 से उम्मीद है कि छावनियों में रहने वाले आम नागरिकों को इससे कोई मुश्किल नहीं होगी। मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार से हो रही है।
सामूहिक विनाश के अस्त्रों से संबंधित विधेयक भी होगा पेश
परिवार न्यायालय (संशोधन) और भारतीय अंटार्कटिक विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जबकि सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधि विरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) संशोधन विधेयक को उसी दिन राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सदन की कार्य सूची के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर सामूहिक विनाश के अस्त्रों से संबंधित विधेयक को राज्यसभा में पेश करेंगे।
दुर्व्यापार रोकथाम विधेयक पेश किया जाएगा
सत्र के दौरान व्यक्तियों का दुर्व्यापार (संरक्षण, देखभाल एवं पुनर्वास) विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें मानव और खासतौर पर महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी की रोकथाम तथा इससे निपटने का प्रावधान किया गया है। लोकसभा की एक बुलेटिन के अनुसार, व्यक्तियों का दुर्व्यापार (संरक्षण, देखभाल एवं पुनर्वास) विधेयक चर्चा एवं पारित करने के लिये संसद में पेश किया जाएगा।
आठ साल में लाखों किसानों की आय दोगुनी हुई : तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार, वैज्ञानिक और किसान समुदायों के चौतरफा प्रयास से पिछले 8 साल में किसानों की आय दोगुनी हो गई। शनिवार को तोमर ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से तैयार की गई ई-बुक का विमोचन किया, जिसमें 75 हजार ऐसे किसानों की कहानियां हैं, जिनकी आय पिछले 8 साल में दोगुनी या दोगुनी से अधिक हो गई। आईसीएआर के 94वें स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री ने कहा कि देश में 14 करोड़ किसान हैं, जिसमें 85 फीसदी छोटे और सीमांत हैं। वहीं आईसीएआर ने कहा कि बागवानी और खेती के माध्यम से किसानों की आय में कुल वृद्धि 125.44 प्रतिशत से 271.69 प्रतिशत रही। 2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था।