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जैसे-जैसे इल्जाम बढ़े, वैसे-वैसे बढ़ता रहा गायत्री का रुतबा, जानिए पूरी कहानी

Wed, 15 Mar 2017 05:17 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Wed, 15 Mar 2017 05:17 PM IST
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Real story of gayatri prasad prajapati, How the BPL card holder became the owner of billions

अखिलेश सरकार के गले की हड्डी बने रहे गैंगरेप के आरोपी कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को आखिर गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी लखनऊ से की। इसके साथ ही महीनों से चल रहे उस ड्रामे का भी पटाक्षेप हो गया जिसमें गैंगरेप के आरोप लगने और सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी के आदेश होने के बावजूद भी गायत्री खुलेआम घूमते रहे और पुलिस के साथ उनका चूहे बिल्ली वाला खेल चलता रहा। जब तक गायत्री गिरफ्तार नहीं हुए तब तक सरकार और पुलिस दोनों आरोपों के घेरे में रही कि जानबूझकर उन्हें बचाया जा रहा है।

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इन आरोपों में इसलिए भी दम लग रहा था कि पहले भी गायत्री के खिलाफ शिकायतें हुई और मुकदमे भी दर्ज हुए लेकिन न सरकार ने कार्रवाई की जरूरत समझी और न ही पुलिस ने। बीपीएल कार्ड धारक से हजारों करोड़ की बेनामी संपति इकट्ठा करने वाले गायत्री के खिलाफ खनन माफिया को संरक्षण देने के आरोप भी लगे और क्षेत्रीय अपराधियों को सरंक्षण देने के भी, लेकिन उनका कभी कुछ नहीं बिगड़ा। आलम ये रहा कि जैसे जैसे गायत्री के खिलाफ आरोप लगते रहे वैसे वैसे ही उनका रुतबा बढ़ता रहा।

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साल 2002 में बीपीएल कार्ड धारक थे गायत्री प्रजापति

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इसको जानने के लिए थोड़ा फ्लैशबैक में जाने की जरूरत है। साल 2002 तक गायत्री प्रसाद प्रजापति और उनके परिवार का नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की लिस्ट में था। मतलब गायत्री प्रसाद प्रजापति बीपीएल कार्ड धारक थे। इसी बीच परिवार की गरीबी दूर करने के लिए उन्होंने प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया।

दिमाग के तेज प्रजापति ने जल्द ही इस काम में ठीक ठाक पैसा कमा लिया। इसी दौरान उन्होंने राजनीति में भी घुसपैठ शुरू कर दी। बात 2010 की है यूपी के विधानसभा चुनावों में दो साल का समय बाकी था तभी गायत्री ने अमेठी जिले के एक बड़े सपा नेता का दामन थाम लिया।

बातों से दूसरों को साधने में माहिर प्रजापति ने एक डेढ़ साल की कसरत में ही अपने लिए अमेठी से टिकट का जुगाड़ भी कर लिया। जिले के एक वरिष्ठ सपा नेता भी बताते हैं कि गायत्री का मुकाबला अमेठी के राजा संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह से था ऐसे में उनके जितने की उम्‍मीद भी किसी को नहीं थी। लेकिन यहीं गायत्री की किस्मत चमकी और उन्होंने अमिता सिंह को मात देकर विधानसभा की चौखट चूम ली।

बताया जाता है गायत्री की यह चमत्कारिक जीत उस समय सपा नेतृत्व की निगाहों में आ गई। सपा मुखिया मुलायम सिंह तभी से उन्हें पसंद करने लगे। इसी बीच गायत्री ने मुलायम दरबार में हाजिरी लगानी शुरू कर दी। सबसे पहली उनकी नजदीकि मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव से बढ़ी। कहा तो ये भी जाता है कि प्रतीक ने गायत्री के साथ मिलकर व्यापार में अच्छा खास पैसा कमाया। गायत्री और उसके बेटों के रियल स्टेट के धंधे में भी प्रतीक की काफी भागीदारी बताई जाती है।

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मुलायम परिवार की नजदीकियों से बने सरकार के चहेते

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प्रतीक के साथ गायत्री ने मुलायम की पत्नी साधना गुप्ता का संरक्षण भी प्राप्त कर लिया। पत्नी और बेटे से नजदीकियों के चलते जल्‍द ही गायत्री ने मुलायम से नजदीकियां बढ़ाने में भी कामयाबी हासिल कर ली। इसी बीच गायत्री ने मुलायम का जन्मदिन पूरी धूमधाम से मनाया। गायत्री की इस चाटुकारिता ने उन्हें सरकार के साथ ही मुलायम परिवार में भी खास बना दिया।

मुलायम भी उन्हें पिछडों के बड़े नेता के तौर पर स्‍थापित करने की सोचने लगे। मुलायम से नजदीकियों का ही असर था कि विधायक बनने के एक साल के भीतर ही उन्हें प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बना दिया गया। फरवरी 2013 में उन्हें सिंचाई राज्यमंत्री का पद दिया गया।

लेकिन गायत्री की किस्मत पलटी खनन विभाग में स्‍वतंत्र प्रभार मंत्री बनाए जाने के बाद। जहां उन्हें जल्द ही प्रमोट कर इसी विभाग का कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। इसके बाद गायत्री ने अपने चेलों और खनन माफियाओं के दम पर अकूल दौलत इकट्ठा की। जिसे उन्होंने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के नाम किया। 

मुलायम परिवार से गायत्री की नजदीकी का एक बड़ा कारण ये भी माना जाता रहा कि गायत्री जो भी कमाते उसमें सरकार के 'खास' लोगों का हिस्सा जरूर बचाकर रखते। इसके चलते उन्हें सत्ता का वरदहस्त बना रहा और वो बेखौफ लगे रहे। 

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सरकार के संरक्षण में खनन के धंधे से हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक बने गायत्री

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गायत्री के खिलाफ लोकायुक्त से लेकर कोर्ट तक लगातार शिकायतें करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर आरोप लगाती हैं कि खनन के धंधे से ही गायत्री ने एक हजार करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति इकट्ठा कर ली है। हालांकि इन सबसे बदस्तूर पार्टी और सरकार में गायत्री का जलवा बना रहा।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री अखिलेश को गायत्री प्रजापति को अपनी कैबिनेट से बर्खास्त करने के एक हफ्ते बाद ही सरकार में वापस लेना पड़ा और कैबिनेट में परिवहन मंत्री जैसा बड़ा ओहदा भी देना पड़ा। ऐसा नहीं है कि गायत्री सिर्फ मुलायम को ही पसंद हैं बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश भी उन पर काफी विश्वास करते हैं।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सपा के शीर्ष नेतृत्व में झगड़े के दौरान उम्‍मीदवारों की जितनी भी लिस्ट जारी हुई उन सभी में गायत्री का नाम शामिल रहा। यहां तक की मुलायम को दरकिनार कर जब अखिलेश ने अपने उम्‍मीदवारों की सबसे अलग लिस्ट जारी की उसमें भी गायत्री का नाम रहा और अंतिम लिस्ट में भी गायत्री अपनी जगह बचाने में शामिल रहे।

खास बात ये है कि कांग्रेस से बेशक सपा का गठबंधन हो गया हो लेकिन पार्टी ने  संजय सिंह की पत्नी अमिता के सामने गठबंधन के ही उम्‍मीदवार के तौर पर गायत्री को टिकट देकर उन पर अपना विश्वास साबित कर दिया। यहां तक की अखिलेश ने उनके लिए चुनावी रैली भी की वो बात दीगर है कि उसमें खुद अखिलेश शामिल नहीं रहे।

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