नागरिकता कानून को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन पर क्या कहती है विदेशी मीडिया
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नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देशभर के कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसे लेकर विदेशी मीडिया में भी कवरेज जारी है। इस कानून ने विदेश मंत्रालय से लेकर गृह मंत्रालय और केन्द्र सरकार तक की चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कई देशों को इसे लेकर सफाई देनी पड़ रही है। हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है कि यह भारत का आंतरिक मामला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश इसे समझ रहे हैं और भारत के रुख से सहमत हैं।
भारत ने आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को रद्द कर दिया था। जहां कुछ विदेशी मीडिया ने संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ भारत में हो रहे मजबूत विरोध को उजागर किया, वहीं कुछ ने नए कानून को 'मुस्लिम विरोधी' और 'फासीवादी' करार दिया है।
द गार्जियन
सबसे पहले बात करते हैं ब्रिटेन के प्रमुख अखबार 'द गार्जियन' की... गार्जियन ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर लिखी खबर में बताया है कि किस तरह से भारत में विरोध फैल रहा है। कई राज्यों में अशांति है। एक खबर में कहा गया है कि नागरिकता कानून को लेकर पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है। मोदी सरकार के अबतक के कार्यकाल में यह पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
इंडिपेंडेंट
ब्रिटेन के इंडिपेंडेंट अखबार ने इस बिल को विवादित बताया है। अखबार ने अपने लेख में लिखा है, भारत की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार ने विवादित कानून पर संसद से मंजूरी हासिल कर ली है। ये कानून पड़ोसी देशों के शरणार्थियों को नागरिकता दिलाने में मदद करेगा, सिवाय मुस्लिमों के'। इस बिल में मुस्लिम शामिल नहीं हैं, क्योंकि इसमें सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को शामिल किया गया है और ये तीनों ही इस्मालिक देश हैं। भाजपा का इस बारे में तर्क है कि एक इस्लामिक देश में किसी मुस्लिम शख्स के साथ धर्म के आधार पर उत्पीड़न नहीं होता है। इसी वजह से इस बिल में सिर्फ अल्पसंख्यकों को शामिल किया गया है।
बीबीसी
लंदन के बड़े मीडिया हाउस बीबीसी का कहना है, सरकार इस कानून से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होने वाले लोगों को भारत में शरण मिलेगी। आलोचकों का कहना है कि इसका वास्तविक एजेंडा भारत के अल्पसंख्यक मुस्लिमों को कम करना है। सरकार की योजना है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का प्रयोग कर सभी घुसपैठियों को 2024 तक देश से बाहर कर दिया जाएगा। एनआरसी पहले ही उत्तर-पूर्वी राज्य असम में लागू किया जा चुका है।
न्यूयॉर्क टाइम्स
अमेरिका के प्रमुख अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने सवाल पूछते हुए लिखा है कि क्या भारत हिन्दू राष्ट्र बनने की तरफ बढ़ रहा है? इस कानून के पारित होने के बाद से विपक्ष एकजुट है। विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर बड़े विरोध-प्रदर्शनों की तैयारी कर रही हैं। भारत की संसद में लोगों को बांटने वाला नागरिकता बिल पारित हो गया है। इस पर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लिखा है कि इस बिल में धार्मिक आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन अवैध शरणार्थी है और कौन नहीं। इस बिल ने दक्षिण एशिया के सभी मुख्य धर्मों को शामिल किया है, सिवाय मुस्लिम धर्म के।
वॉशिंगटन पोस्ट
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, भारत ने मुस्लिम शरणार्थियों को अलग रखते हुए विवादित नागरिकता बिल को पारित कर दिया है। नए कानून ने कुछ दक्षिण एशिया के देशों के शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन मुस्लिम इसमें शामिल नहीं हैं।
वाल स्ट्रीट जर्नल
वाल स्ट्रीट जर्नल के मुख्य पेज पर प्रदर्शनकारियों की धार्मिक पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए लिखा गया, भारत के नए नागरिकता कानून के खिलाफ मुस्लिम समुदाय विरोध कर रहा है।
द टाइम्स ऑफ इजराइल
इजराइल के अखबार 'द टाइम्स ऑफ इजराइल ने' इस खबर को प्रमुखता देते हुए 'भारत में छह लोगों की मौत, एंटी मुस्लिम कानून को लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहा है' इस हेडलाइन के साथ एक लेख छापा।