गंगा को प्रदूषण से बचाएंगे ‘रामगंगा मित्र’, आठ जिलों में बनाए गए हैं 1200 मित्र
- अमृत खाद और अमृत पानी से करेंगे खेती
- आठ जिलों में बनाए गए हैं 1200 मित्र
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गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए अब रामगंगा किनारे की खेती को अमृत खाद और अमृत पानी से सींचा जाएगा। इसके लिए रामगंगा किनारे के गांवों में रामगंगा मित्र बनाए गए हैं। छह जिलों में 1200 रामगंगा मित्र किसान खेती को रासायनिक खादों से दूर रखकर जैविक खाद के साथ ही कीटनाशकों के जहर से दूर रखेंगे। इससे गंगा को प्रदूषण से मुक्त किया जा सकेगा, क्योंकि रामगंगा गंगा अपने जल में तमाम प्रदूषण समेटकर ले जाती है।
गंगा में मिलने वाली प्रमुख नदियों में रामगंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त करने के लिए भारत सरकार की नमामि गंगे योजना में शामिल किया गया है। इसी के तहत कालागढ़ बांध के बाद बिजनौर से लेकर कन्नौज जनपद तक पड़ने वाले आठ जनपदों में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया संस्था ने जागरूकता के लिए 1200 रामगंगा मित्रों का चयन किया गया है।
यह रामगंगा मित्र मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद और कन्नौज में रामगंगा किनारे के गांवों के रहने वाले हैं, यह रामगंगा मित्र खेतों में जैविक और अमृत खेती करके जागरूकता पैदा करेंगे।
जागरूकता अभियान शुरू
रामगंगा मित्र खेतों में रासायनिक कीटनाशक और उर्वरकों का प्रयोग रोककर अमृत पानी जोकि नीम की पत्तियों, गोबर और गुड़ से तैयार कीटनाशक का अमृत पानी के रूप में छिड़काव करेंगे। संस्था ने किसानों को प्रशिक्षण देकर जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। यह किसान मित्र धीरे-धीरे जागरूकता पैदा करेंगे।
रामगंगा मित्र अभियान के लिए केंद्र सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत शुरू किया है। इसके लिए आठ जिलों में 40 गांवों में 1200 रामगंगा मित्र बनाए गए हैं। आगे चलकर इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।
बलवीर सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया