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डेल्टा प्लस वैरिएंट: आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक इसे बताया बेहद गंभीर, कही ये बात
Sat, 26 Jun 2021 03:11 PM IST
Tanuja Yadav
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 26 Jun 2021 03:11 PM IST
सार
आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट काफी तेजी से फैला। उन्होंने आगे कहा कि अगर डेल्टा वैरिएंट को लेकर वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में देखा जाता है तो डेल्टा प्लस को भी इसी श्रेणी में देखा जाना चाहिए।
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आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर
- फोटो : ANI
विस्तार
देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट के ताजा मामले बढ़ते जा रहे हैं और धीरे-धीरे ये नया वैरिएंट देश के कई राज्यों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर जानकारों का कहना है कि चिंता की बात नहीं है, क्योंकि इस पर भारत में इस्तेमाल की जाने वाली दोनों वैक्सीन असरदार हैं।
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हालांकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पूर्व वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा गया है और यह वैरिएंट बहुत तेजी से फैला है। उन्होंने आगे कहा कि अगर डेल्टा वैरिएंट चिंता का विषय है तो डेल्टा प्लस वैरिएंट को भी इसी श्रेणी के तौर पर देखना चाहिए।
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When I said #DeltaVariant can go for cell to cell transfer, what does it mean in terms of damage to organs? If it goes into brain, what will happen? It's more likely to produce neurological symptoms as common manifestation: Raman Gangakhedkar, ex-Head Scientist, ICMR pic.twitter.com/2q1Rv1AL7Y
— ANI (@ANI) June 26, 2021
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उन्होंने आगे कहा कि जब डेल्टा वैरिएंट कोशिकाओं से कोशिकाओं तक पहुंचता है तो अंगो को नुकसान के संदर्भ में इसका क्या मतलब है? उन्होंने आगे कहा कि अगर ये दिमाग तक पहुंच गया तो इसका क्या मतलब होगा? उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा होता है तो इससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण ज्यादा पैदा होंगे।
आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने आगे कहा कि ये निर्भर करता है कि मैं शरीर के किस अंग की बात कर रहा हूं। उन्होंने आगे कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट उन अंगों को विशेष तौर पर नुकसान पहुंचाएगा, अगर यह सच साबित होता है कि यह मुख्य पैथाफिजियोलॉजिकल परिवर्तन का कारण बन रहा है और अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर रहा है।