Ram Navami violence: एफआईआर-दोषियों पर कार्रवाई की मांग; हिंदू संगठन ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
एनजीओ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए रामनवमी या ऐसे अन्य अवसरों पर निकाले जाने वाले हिंदू धार्मिक जुलूसों के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की है।
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एक हिंदू संगठन ने देश के विभिन्न हिस्सों में राम नवमी पर हुई हिंसाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष अदालत में दायर की गई याचिका में मामलों में एफआईआर दर्ज कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका ऐसे वक्त दाखिल की गई है, जब देश के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें आ रही हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नफरती भाषणों पर राज्य सरकारों की निष्क्रियता को लेकर सख्ती दिखाई है। जस्टिस केएम जोसफ की पीठ ने नफरती भाषणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राज्य कमजोर और शक्तिहीन हो गए हैं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने किया कोर्ट का रुख
एनजीओ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए रामनवमी या ऐसे अन्य अवसरों पर निकाले जाने वाले हिंदू धार्मिक जुलूसों के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की है। वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया कि इस वर्ष रामनवमी के मौके पर कुछ लोगों ने देश के विभिन्न हिस्सों में जैसे- हावड़ा, उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल), सासाराम और नालंदा (बिहार), हैदराबाद (तेलंगाना), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), वडोदरा (गुजरात), जमशेदपुर (झारखंड) में पूर्व नियोजित तरीके से बड़े पैमाने पर हिंसा की है।
नुकसान का आंकलन करने का निर्देश देने की मांग
याचिका में संबंधित राज्य सरकारों को हिंसा में घायल हुए या जान गंवाने वाले लोगों को हुए नुकसान का आंकलन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को उन कारणों के बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी मांगे हैं, जिनके कारण भीड़ के हमले और हिंसा हुई। रामनवमी पर्व पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलग-अलग घटनाओं में 14 श्रद्धालुओं की मौत हुई और देश के कुछ हिस्सों में झड़पों और आगजनी ने रामनवमी उत्सव को धूमिल किया।