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राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी: कहा- आतंकी हमला हुआ तो पहले से कड़ा जवाब देगा भारत; और क्या बोले?
Thu, 15 Oct 2026 03:49 PM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Oct 2026 03:49 PM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान से होने वाली किसी भी अगली आतंकी घटना का भारत पहले से अधिक कड़ा जवाब देगा। नई दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क डिफेंस कॉन्क्लेव में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमलों और सर्जिकल स्ट्राइक को आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदली रणनीति का प्रतीक बताया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से होने वाली किसी भी अगली आतंकी घटना का जवाब पहले से भी अधिक कड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा संवाद, सह-अस्तित्व और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करती है, लेकिन शांति की प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
नई दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क डिफेंस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमले और सर्जिकल स्ट्राइक केवल सैन्य अभियान नहीं थे। ये आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति में निर्णायक बदलाव के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध जताने तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर उसे खत्म करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है।
शांति के लिए ताकत और तैयारी जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से ज्यादातर आतंकियों की सक्रियता की अवधि घटकर एक साल से भी कम रह गई है। उनके मुताबिक, भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक साल के भीतर सुरक्षा बल ऐसे आतंकियों को मार गिरा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए ताकत और क्षमता जरूरी हैं। भारत शांति चाहता है, लेकिन देश की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर युद्ध का सामना करने को भी तैयार है।
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उन्होंने कहा, "शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है, लेकिन हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारा लक्ष्य ऐसा भारत बनाना है, जो शांति की वकालत करे, लेकिन सुरक्षा के मामले में सतर्क रहे और अपनी संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।"
डिजिटल दौर में सुरक्षा के नए खतरे
बदलते सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने हाइब्रिड, हाईटेक और अत्यधिक तीव्र युद्ध के दौर में सतर्कता और तैयारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने डिजिटल युग में सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ते जटिल स्वरूप पर भी चर्चा की।
उन्होंने सुरक्षा के लिए पांच तरह के खतरों का जिक्र किया। इनमें गलत सूचना फैलाना, अस्थिरता पैदा करना, कामकाज में बाधा डालना, धोखा देना और विनाश करना शामिल हैं। उन्होंने इन्हें अंग्रेजी में डिसइन्फॉर्मेशन, डेस्टेबिलाइजेशन, डिसरप्शन, डिसेप्शन और डिस्ट्रक्शन के रूप में बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद अब केवल संगठित समूहों तक सीमित नहीं है। अकेले हमला करने वाले कट्टरपंथियों और तथाकथित 'व्हाइट कॉलर आतंकवाद' से भी खतरे बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे लोगों की पहचान करना और संभावित हमलों को रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सह-पायलट की घटना का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने उस हालिया घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें एक सह-पायलट पर यात्री विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्होंने कैप्टन स्मित माछर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर बड़े आतंकी हमले को टालने में भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि यह घटना अकेले हमला करने वाले लोगों से पैदा होने वाले खतरे को दिखाती है। साथ ही, यह भी बताती है कि किसी व्यक्ति की सतर्कता और साहस नफरत से प्रेरित लोगों की साजिश को नाकाम कर सकता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों के साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
'स्मार्ट पावर' पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक रक्षा रणनीति में सैन्य ताकत के साथ कूटनीतिक और अन्य प्रभावी क्षमताओं का भी इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के समन्वय से 'स्मार्ट पावर' की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था में सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों और लंबे समय तक लक्ष्य के ऊपर मंडराने वाले हथियारों के साथ किफायती हथियारों का भी इस्तेमाल होना चाहिए। इसी तरह, मानवीय खुफिया जानकारी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रणालियों के साथ कम लागत वाली, लचीली तकनीकों को शामिल करना जरूरी है।
रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक
रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से देश का रक्षा उत्पादन 2014 के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत के रक्षा उत्पाद करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत इस साल दो लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इसके अलावा, 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्यात प्रक्रिया में सुधार का जिक्र
राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्यात बढ़ने का श्रेय प्रक्रियाओं को आसान बनाने वाले सुधारों को दिया। इनमें डिफेंस ईएक्सआईएम पोर्टल, ऑनलाइन मंजूरी, ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस, गुणवत्ता प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाना और ग्रीन चैनल नीति शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन उपायों से वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता बढ़ी है और घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिली है।
स्टार्टअप और एमएसएमई को मिल रही मदद
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक के सामान और सेवाओं की खरीद को मंजूरी दी है। नई तकनीकों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) के तहत 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषकों को जोड़ा गया था और 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए थे। 2018 में कुछ दर्जन रक्षा स्टार्टअप से शुरू हुआ यह क्षेत्र अब 2,000 से अधिक स्टार्टअप तक पहुंच गया है। ये कंपनियां ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद देश में बन रहा
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा बलों के इस्तेमाल में आने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 का उत्पादन अब देश में ही किया जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात भी कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए राष्ट्रीय मानक विकसित किया है।
रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाने को भी देश के रक्षा ढांचे को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम बताया।
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नई दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क डिफेंस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमले और सर्जिकल स्ट्राइक केवल सैन्य अभियान नहीं थे। ये आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति में निर्णायक बदलाव के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध जताने तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर उसे खत्म करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है।
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शांति के लिए ताकत और तैयारी जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से ज्यादातर आतंकियों की सक्रियता की अवधि घटकर एक साल से भी कम रह गई है। उनके मुताबिक, भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक साल के भीतर सुरक्षा बल ऐसे आतंकियों को मार गिरा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए ताकत और क्षमता जरूरी हैं। भारत शांति चाहता है, लेकिन देश की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर युद्ध का सामना करने को भी तैयार है।
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पिछले 12 वर्षों में भारत के डिफेन्स सेक्टर में व्यापक स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स हुए हैं। आज सभी डीपीएसयू प्रॉफिट-मेकिंग एंटिटीज़ बन चुके हैं और स्वदेशी डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिली है। इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने से लेकर अत्याधुनिक डिफेन्स सिस्टम के घरेलू उत्पादन तक, भारत एक आत्मनिर्भर डिफेन्स इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ वैश्विक सुरक्षा में भी योगदान देगा।
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 15, 2026
उन्होंने कहा, "शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है, लेकिन हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारा लक्ष्य ऐसा भारत बनाना है, जो शांति की वकालत करे, लेकिन सुरक्षा के मामले में सतर्क रहे और अपनी संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।"
डिजिटल दौर में सुरक्षा के नए खतरे
बदलते सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने हाइब्रिड, हाईटेक और अत्यधिक तीव्र युद्ध के दौर में सतर्कता और तैयारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने डिजिटल युग में सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ते जटिल स्वरूप पर भी चर्चा की।
उन्होंने सुरक्षा के लिए पांच तरह के खतरों का जिक्र किया। इनमें गलत सूचना फैलाना, अस्थिरता पैदा करना, कामकाज में बाधा डालना, धोखा देना और विनाश करना शामिल हैं। उन्होंने इन्हें अंग्रेजी में डिसइन्फॉर्मेशन, डेस्टेबिलाइजेशन, डिसरप्शन, डिसेप्शन और डिस्ट्रक्शन के रूप में बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद अब केवल संगठित समूहों तक सीमित नहीं है। अकेले हमला करने वाले कट्टरपंथियों और तथाकथित 'व्हाइट कॉलर आतंकवाद' से भी खतरे बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे लोगों की पहचान करना और संभावित हमलों को रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सह-पायलट की घटना का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने उस हालिया घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें एक सह-पायलट पर यात्री विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्होंने कैप्टन स्मित माछर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर बड़े आतंकी हमले को टालने में भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि यह घटना अकेले हमला करने वाले लोगों से पैदा होने वाले खतरे को दिखाती है। साथ ही, यह भी बताती है कि किसी व्यक्ति की सतर्कता और साहस नफरत से प्रेरित लोगों की साजिश को नाकाम कर सकता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों के साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
'स्मार्ट पावर' पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक रक्षा रणनीति में सैन्य ताकत के साथ कूटनीतिक और अन्य प्रभावी क्षमताओं का भी इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के समन्वय से 'स्मार्ट पावर' की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था में सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों और लंबे समय तक लक्ष्य के ऊपर मंडराने वाले हथियारों के साथ किफायती हथियारों का भी इस्तेमाल होना चाहिए। इसी तरह, मानवीय खुफिया जानकारी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रणालियों के साथ कम लागत वाली, लचीली तकनीकों को शामिल करना जरूरी है।
रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक
रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से देश का रक्षा उत्पादन 2014 के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत के रक्षा उत्पाद करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत इस साल दो लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इसके अलावा, 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्यात प्रक्रिया में सुधार का जिक्र
राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्यात बढ़ने का श्रेय प्रक्रियाओं को आसान बनाने वाले सुधारों को दिया। इनमें डिफेंस ईएक्सआईएम पोर्टल, ऑनलाइन मंजूरी, ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस, गुणवत्ता प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाना और ग्रीन चैनल नीति शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन उपायों से वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता बढ़ी है और घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिली है।
स्टार्टअप और एमएसएमई को मिल रही मदद
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक के सामान और सेवाओं की खरीद को मंजूरी दी है। नई तकनीकों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) के तहत 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषकों को जोड़ा गया था और 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए थे। 2018 में कुछ दर्जन रक्षा स्टार्टअप से शुरू हुआ यह क्षेत्र अब 2,000 से अधिक स्टार्टअप तक पहुंच गया है। ये कंपनियां ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद देश में बन रहा
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा बलों के इस्तेमाल में आने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 का उत्पादन अब देश में ही किया जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात भी कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए राष्ट्रीय मानक विकसित किया है।
रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाने को भी देश के रक्षा ढांचे को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम बताया।