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सिंधिया की राह पर पायलट, मध्यप्रदेश को दोहराएगा राजस्थान,सचिन बोले- अल्पमत में गहलोत सरकार
Mon, 13 Jul 2020 12:01 AM IST
अवधेश कुमार
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Mon, 13 Jul 2020 12:01 AM IST
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सचिन पायलट
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ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूसरी बड़ी कामयाबी मिलती नजर आ रही है। उन्होंने मित्र सचिन पायलट को फोन करके देर शाम राजस्थान की गहलोत सरकार के अल्पमत में आने का बयान जारी करवा दिया है। इस तरह से वह भाजपा की झोली में राजस्थान की सरकार डालने जा रहे हैं। सचिन पायलट ने 30 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है। उन्होंने आज मानेसर, गुड़गांव और दिल्ली में ठहरे राजस्थान विधायकों से भेंट की और बागी होने का निर्णय कर लिया। बताते हैं सचिन पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उनकी दिन में ज्योतिरादित्य से मुलाकात की सूचना के बाद पार्टी के दोनों शीर्ष नेताओं ने समय नहीं दिया।
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पायलट को मनाने में अविनाश पांडे समेत अन्य हुए फेल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अविनाश पांडे सचिन पायलट से बात करने का लगातार प्रयत्न कर रहे हैं। अजय माकन समेत अन्य नेताओं की भी कोशिश बेकार हो गई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने भी पायलट से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बताते हैं स्थिति हाथ से बाहर होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं के तमाम प्रयास पर सात बजे शाम तक सचिन पायलट ने आखिरी पत्ता नहीं खोला था।
उन्होंने जयपुर में विधायकों की बैठक में शामिल होने के पार्टी के दबाव पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था। हलांकि शनिवार रात 9.40 बजे बुलाई गई बैठक में वह शामिल भी नहीं हुए थे। बताते हैं रविवार की देर शाम सचिन पायलट ने अचानक अपना निर्णय ले लिया। अब वह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई बैठक में शरीक नहीं होंगे। उनके साथ दिल्ली, एनसीआर में ठहरे दो दर्जन विधायक भी शामिल नहीं होंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अविनाश पांडे सचिन पायलट से बात करने का लगातार प्रयत्न कर रहे हैं। अजय माकन समेत अन्य नेताओं की भी कोशिश बेकार हो गई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने भी पायलट से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बताते हैं स्थिति हाथ से बाहर होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं के तमाम प्रयास पर सात बजे शाम तक सचिन पायलट ने आखिरी पत्ता नहीं खोला था।
उन्होंने जयपुर में विधायकों की बैठक में शामिल होने के पार्टी के दबाव पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था। हलांकि शनिवार रात 9.40 बजे बुलाई गई बैठक में वह शामिल भी नहीं हुए थे। बताते हैं रविवार की देर शाम सचिन पायलट ने अचानक अपना निर्णय ले लिया। अब वह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई बैठक में शरीक नहीं होंगे। उनके साथ दिल्ली, एनसीआर में ठहरे दो दर्जन विधायक भी शामिल नहीं होंगे।
क्या कल भाजपा में शामिल होंगे सचिन पायलट?
भाजपा के नेता इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। एक महासचिव का कहना है कि कोई भी भाजपा में आना चाहे तो उसका स्वागत है। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बयान देकर एक बड़ा इशारा कर दिया है। सचिन पायलट की नाराजगी की तरफ इशारा करते हुए ज्योतिरादित्य ने कहा कि कांग्रेस में योग्य लोगों का सम्मान नहीं होता। ज्योतिरादित्य के इस बयान के बाद से कांग्रेस नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। उन्हें लग रहा है कि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया में कोई डील हो चुकी है। वैसे भी सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों पुराने मित्र हैं।
कांग्रेस में दोनों राहुल गांधी कोटरी के सदस्यों में गिने जाते थे। दोनों ही युवा नेता पूर्व दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व. राजेश पायलट और स्व. माधव राव सिंधिया के पुत्र हैं। राजेश पायलट, माधव राव सिंधिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी में भी मित्रता का रिश्ता था। दोनों की दस जनपथ और राहुल गांधी लगातार पार्टी में सीधी पहुंच रही है।
भाजपा के नेता इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। एक महासचिव का कहना है कि कोई भी भाजपा में आना चाहे तो उसका स्वागत है। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बयान देकर एक बड़ा इशारा कर दिया है। सचिन पायलट की नाराजगी की तरफ इशारा करते हुए ज्योतिरादित्य ने कहा कि कांग्रेस में योग्य लोगों का सम्मान नहीं होता। ज्योतिरादित्य के इस बयान के बाद से कांग्रेस नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। उन्हें लग रहा है कि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया में कोई डील हो चुकी है। वैसे भी सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों पुराने मित्र हैं।
कांग्रेस में दोनों राहुल गांधी कोटरी के सदस्यों में गिने जाते थे। दोनों ही युवा नेता पूर्व दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व. राजेश पायलट और स्व. माधव राव सिंधिया के पुत्र हैं। राजेश पायलट, माधव राव सिंधिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी में भी मित्रता का रिश्ता था। दोनों की दस जनपथ और राहुल गांधी लगातार पार्टी में सीधी पहुंच रही है।
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