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राजस्थान: 28 विधायकों पर ही उड़ेगा पायलट का प्लेन, ये है पूरा अंक गणित
Mon, 13 Jul 2020 02:07 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Mon, 13 Jul 2020 02:07 AM IST
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अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का अलग राजनीतिक विमान तभी उड़ान भरेगा जब उनके साथ 28 विधायक भी सवार हों। राज्य में गहलोत की सरकार को गिराकर नई सरकार बनाने के लिए जो अंक गणित चाहिए होगा उतनी संख्या भाजपा के पास नहीं है। कांग्रेस अल्पमत में लाने के लिए कम से कम 35 विधायकों को इस्तीफा देना होगा।
भाजपा को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के कम से कम 28 विधायकों के छोड़ने के साथ 13 निर्दलीय भी साथ लेने होंगे जो अभी गहलोत को समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस विधायक जो भी पार्टी छोड़ेगा उसकी सदस्यता खुद ब खुद चली जाएगी।
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कांग्रेस के पास अपने 107 विधायक हैं और 13 निर्दलीय सहयोग कर रहे हैं। जबकि भाजपा के अपने 72 और 8 सहयोगी हैं। 200 विधायकों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायक चाहिए। 107 वाली कांग्रेस से 35 विधायक अगर इस्तीफा देते हैं तो 72 रह जाएंगे 13 निर्दलीय मिलकर यह संख्या 85 हो जाएगी। कांग्रेस से असंबद्ध किए गए तीन विधायकों को अलग कर दें तो आंकड़ा 82 होता है। भाजपा के सहयोगी समेत 80 हैं तीन और जोड़ दें तो 83 होंगे।
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भाजपा को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के कम से कम 28 विधायकों के छोड़ने के साथ 13 निर्दलीय भी साथ लेने होंगे जो अभी गहलोत को समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस विधायक जो भी पार्टी छोड़ेगा उसकी सदस्यता खुद ब खुद चली जाएगी।
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कांग्रेस के पास अपने 107 विधायक हैं और 13 निर्दलीय सहयोग कर रहे हैं। जबकि भाजपा के अपने 72 और 8 सहयोगी हैं। 200 विधायकों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायक चाहिए। 107 वाली कांग्रेस से 35 विधायक अगर इस्तीफा देते हैं तो 72 रह जाएंगे 13 निर्दलीय मिलकर यह संख्या 85 हो जाएगी। कांग्रेस से असंबद्ध किए गए तीन विधायकों को अलग कर दें तो आंकड़ा 82 होता है। भाजपा के सहयोगी समेत 80 हैं तीन और जोड़ दें तो 83 होंगे।
गहलोत ने कभी बनने नहीं दिया अपना प्रतिस्पर्धी
अशोक गहलोत ने राजस्थान की राजनीतिक जमीन पर कभी अपने प्रतिस्पर्धी को मजबूत नहीं होने दिया। कांग्रेस में राज्य से तमाम बड़े नेता उभरे जरूर लेकिन गहलोत के आगे टिक नहीं पाए। गहलोत ने राज्य के तीन कद्दावर नेता पहले परशराम मदेरणा, फिर शीशराम ओला और नाथूराम मिर्धा को राज्य की राजनीति में सहज और स्थापित नहीं होने दिया। अशोक गहलोत की सचिन पायलट से अदावत को भी इसी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दरअसल गहलोत ये मामने को तैयार नहीं हैं कि सचिन पायलट जिनके पिता राजेश पायलट कभी उनके साथ राजनीति करते थे उन्हें राज्य की राजनीति में उनके समकक्ष माना जाए। यही कारण है कि गहलोत बार बार एक की जगह दो डिप्टी सीएम और एक व्यक्ति एक पद की बात कह रहे हैं। ऐसा होने से पायलट के समानांतर एक डिप्टी सीएम होगा और अध्यक्ष पद भी चला जाएगा। सूत्रों की मानें तो गहलोत सीपी जोशी को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी देकर पायलट का कद छोटा करना चाहते हैं।
अशोक गहलोत ने राजस्थान की राजनीतिक जमीन पर कभी अपने प्रतिस्पर्धी को मजबूत नहीं होने दिया। कांग्रेस में राज्य से तमाम बड़े नेता उभरे जरूर लेकिन गहलोत के आगे टिक नहीं पाए। गहलोत ने राज्य के तीन कद्दावर नेता पहले परशराम मदेरणा, फिर शीशराम ओला और नाथूराम मिर्धा को राज्य की राजनीति में सहज और स्थापित नहीं होने दिया। अशोक गहलोत की सचिन पायलट से अदावत को भी इसी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दरअसल गहलोत ये मामने को तैयार नहीं हैं कि सचिन पायलट जिनके पिता राजेश पायलट कभी उनके साथ राजनीति करते थे उन्हें राज्य की राजनीति में उनके समकक्ष माना जाए। यही कारण है कि गहलोत बार बार एक की जगह दो डिप्टी सीएम और एक व्यक्ति एक पद की बात कह रहे हैं। ऐसा होने से पायलट के समानांतर एक डिप्टी सीएम होगा और अध्यक्ष पद भी चला जाएगा। सूत्रों की मानें तो गहलोत सीपी जोशी को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी देकर पायलट का कद छोटा करना चाहते हैं।