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खत्म हो सकती है ट्रेनों की लेटलतीफी, नई तकनीक दिलाएगी समस्या से निजात

Mon, 31 Dec 2018 01:45 AM IST
Gaurav Pandey नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 31 Dec 2018 01:45 AM IST
सार

  • ट्रेनों की समय-सारिणी सुधारने के लिए रेलवे लेगा तकनीक का सहारा 
  • ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग सिस्टम से लैस होंगे लोकोमोटिव       
  • यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम से समय पर चलेंगी ट्रेनें 
  • अचानक से नहीं आएगी ट्रेन के इंजन या कोच में खराबी

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Railway will use new technology to keep trains on time

विस्तार

ट्रेनों की समय-सारिणी सुधारने में रेलवे तकनीक का सहारा लेगा। इस तकनीक के तहत जहां पूरे ट्रेन की अब ऑनलाइन मॉनीटरिंग होगी, वहीं यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम से ट्रेनें समय पर चलेंगी। माउंटेड सेंसर से ट्रेन का इंजन, कोच, फ्रेट कार की हालत को मॉनिटर किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अचानक से इंजन, कोच में खराबी नहीं होगी। मॉनिटरिंग के तहत पूर्व में ही सूचना मिल जाएगी तो इसे आसानी से बदलकर ट्रेन चलाई जा सकेगी। इसके अलावा रेलवे यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम से भी ट्रेनों की समयबद्धता ठीक करने वाली तकनीक पर काम कर रहा है। 

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भारतीय रेलवे ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग सिस्टम (ओबीसीएमएस) के लिए रोलिंग स्टॉक (ट्रेनों के कोच) माउंटेड सेंसर लगाने की तकनीक से लैस करने की योजना पर काम कर रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को सुरक्षित सफर कराना तो होगा ही साथ ही समय पर कोच मेंटेंनेस का काम भी पूरा होता रहेगा। अचानक से होने वाली गड़बड़ी और इसके कारण ट्रेनों की बिगड़ने वाली समय-सारिणी पर अंकुश लगेगा। मेल ट्रेन भी समय पर चलेंगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक को विकसित करने के लिए मंशा पत्र (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) कई कंपनियों से मांगी गई है। ताकि ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग ट्रेनों की की जा सके। 
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इसके अलावा रेलवे ने आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली पर भी काम कर रहा है। इसके तहत यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का सहारा लिया जाएगा। प्रयोग के तौर पर 640 किलोमीटर ट्रेक पर परीक्षण भी किया गया है। इस सिस्टम को स्वर्णिम चतुर्भुज और इसके सहायक ट्रैक पर लगाया जाएगा। झांसी-बीना, नागपुर-बडनेरा, येरागुंटल-रेणिगुंटा और विजयानगरम-पलासा रेलवे रूट को इस सिग्नल प्रणाली से लैस किया जाएगा। रेलवे इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1609 करोड़ रुपया खर्च करेगा। इसका फायदा ट्रेनों के समय-पालन व सुरक्षित सफर के लिए होगा।

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