Rahul-Varun Meeting: केदारनाथ में लिखी गई यह सियासी स्क्रिप्ट, क्या वरुण लड़ेंगे कांग्रेस से लोकसभा का चुनाव?
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विस्तार
केदारनाथ के पुजारी निवास में सियासत की वह स्क्रिप्ट तैयार की गई, जिसके आधार पर कहा जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बदली हुई तस्वीर नजर आने वाली है। दरअसल केदारनाथ के पुजारी निवास में राहुल गांधी और भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी की मुलाकात हुई है। इस मुलाकात के बाद भी सियासी गलियारों में कयास यही लगाए जा रहे हैं कि क्या वरुण गांधी आने वाले लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के साथ जुड़ कर चुनाव लड़ेंगे? सियासी जानकारों का मानना है अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर यह कांग्रेस और वरुण दोनों के लिए सियासी तौर पर बहुत फायदे का सौदा हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी और वरुण गांधी की मुलाकात केदारनाथ के रास्ते में पुजारी निवास में हुई। सूत्रों के मुताबिक तकरीबन 40 मिनट तक हुई इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और वरुण गांधी के बीच बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि इस बातचीत के दौरान वहां और कोई भी व्यक्ति नहीं था। लेकिन बताया यही जा रहा है कि इस दौरान वरुण गांधी के परिवार से भी राहुल गांधी ने मुलाकात कर बात की। इस बातचीत को लेकर सियासत में अब तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार शांतिलाल पोखरियाल कहते हैं जिस तरीके से वरुण गांधी लगातार भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हैं, उससे यह अंदाजा पहले से लगाया जा रहा था कि उनका किसी ने किसी सियासी दल से नाता जुड़ सकता है। वह कहते हैं कि शुरुआती दौर में चर्चाएं समाजवादी पार्टी के साथ थीं। लेकिन राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बाद यह माना जा रहा है कि संभव है लोकसभा चुनाव से पहले दोनों परिवारों के बीच में एकता हो जाए, और सियासी रूप से वरुण गांधी कांग्रेस के साथ आ जाएं।
राजनीतिक विश्लेषण और वरिष्ठ पत्रकार अरुण चतुर्वेदी कहते हैं कि बीते कुछ समय में वरुण गांधी का भारतीय जनता पार्टी पर किए जा रहे सियासी हमले को देखें, तो सहज ही अंदाजा लग जाता है कि आने वाले चुनाव में वह किस दिशा में जा रहे हैं। हालांकि अभी तक वरुण गांधी और राहुल गांधी की ओर से इस मुलाकात के बारे में कोई टिप्पणी या कोई जानकारी तो साझा नहीं की गई है। लेकिन इस यात्रा के दौरान मौजूद रहे सूत्र बताते हैं कि यह मुलाकात बहुत महत्वपूर्ण और बहुत ही गोपनीय थी। सियासी जानकारों का कहना है कि वैसे तो राहुल गांधी की केदारनाथ की यात्रा के पीछे भी एक बड़ा मकसद था, लेकिन वरुण गांधी का भी दौरा करना कोई सामान्य और महज संयोग जैसा नहीं दिख रहा है। इसलिए राहुल और वरुण इस मुलाकात को सियासी गलियारों में महज संयोग नहीं बल्कि आने वाले लोकसभा के चुनावों से पहले बहुत बड़े प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
सियासी जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी और वरुण गांधी की मुलाकात भले केदारनाथ में हुई हो, लेकिन वरुण गांधी बीते कुछ समय से कांग्रेस की सियासत को ही आगे बढ़ाने में लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद नासिर कहते हैं कि अगर 2 महीने पहले रायबरेली के संजय गांधी अस्पताल की घटना को आप देखें, तो पता चल जाता है कि वरुण गांधी ने किस तरीके से भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरा था। वरुण गांधी के पिता संजय गांधी के नाम पर शुरू किए गए इस अस्पताल का शुभारंभ उनकी दादी इंदिरा गांधी ने किया था। जब एक घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अस्पताल को सील कर दिया गया, तो वरुण गांधी ने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को चिट्ठी लिखकर अस्पताल की महत्ता के बारे में जिक्र किया था। सियासी गलियारों में कयास उसी वक्त लगाए जाने लगे थे कि आखिर वरुण गांधी का रायबरेली की जनता के लिए उमड़ा यह प्रेम सियासी है या कुछ और।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से वरुण गांधी भाजपा और उनकी नीतियों को लगातार निशाने पर लेते आ रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा के चुनाव में उनका सियासी ठिकाना बदल सकता है। राहुल की मुलाकात के बाद इस तरीके के कयास और पुख्ता होते जा रहे हैं। राजनीतिक जानकार मुकेश सिंह कहते हैं कि पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जिससे स्पष्ट हुआ है कि अगले चुनाव में वरुण गांधी भाजपा से अलग होकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि स्पष्ट रूप से अभी किसी भी सियासी दल ने और वरुण गांधी ने इस तरीके का कोई साफ-साफ संदेश तो नहीं दिया है। लेकिन कभी समाजवादी पार्टी तो कभी कांग्रेस में उनके आने की अटकलें लगती रही हैं।
मुकेश सिंह कहते हैं कि जब मुंशीगंज के संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस रद्द होने पर वरुण गांधी ने भाजपा सरकार को घेरकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, तो उसका बड़ा सियासी संदेश रायबरेली अमेठी की जनता में गया था। क्योंकि अपनी चिट्ठी में वरुण गांधी ने न सिर्फ अपनी दादी इंदिरा गांधी का जिक्र किया था, बल्कि स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानी का भी जिक्र इस चिट्ठी के माध्यम से किया था। यही वजह है कि वरुण गांधी के अब रायबरेली या अमेठी से कांग्रेस से चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी इलाके में होने लगी थीं। अब केदारनाथ में वरुण गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की चर्चा भी सियासी गलियारों में कई तरह के कयासों को आगे बढ़ा रही है।